नई दिल्ली। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत इस्तीफा दे सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने इसकी जानकारी भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को दे दी है। हालांकि ये भी कहा जा रहा है कि हाईकमान ने ही रावत को इस्तीफा देने के लिए कहा है। रावत कुछ देर में राज्यपाल बेबी रानी मौर्य से मुलाकात कर सकते हैं। रावत को भाजपा आलाकमान ने बुधवार को दिल्ली तलब किया था। वहां गृह मंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा ने उनसे मुलाकात की थी।
पिछले एक हफ्ते से ही ये कयास लगाए जा रहे थे कि उत्तराखंड में एक बार फिर मुख्यमंत्री का चेहरा बदल सकता है। उनके इस्तीफे के पीछे संवैधानिक मजबूरी को वजह बताया जा रहा है। वे अभी राज्य के किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। यही बात उनके मुख्यमंत्री बने रहने के आड़े आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, BJP हाईकमान ने उन्हें इस बारे में बता दिया था।
जल्द बुलाई जा सकती है विधायक दल की बैठक
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीरथ सिंह रावत ने आज ही राज्यपाल से मिलने के लिए वक्त मांगा है। इस मुलाकात में वे उन्हें अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। राज्य के अगले मुख्यमंत्री के लिए सतपाल महाराज, धन सिंह समेत 4 वरिष्ठ विधायकों के नाम की चर्चा है। इस मसले पर जल्द ही पार्टी विधायक दल की बैठक बुलाई जा सकती है।
तीरथ सिंह रावत के सामने संवैधानिक समस्या क्या है?
त्रिवेंद्र सिंह रावत के इस्तीफे के बाद तीरथ सिंह रावत ने 10 मार्च को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। अब संविधान के मुताबिक पौड़ी गढ़वाल से भाजपा सांसद तीरथ को 6 महीने के भीतर विधानसभा उपचुनाव जीतना होगा, तभी वो CM रह पाएंगे।
यानी 10 सितंबर से पहले उन्हें विधायकी जीतनी होगी। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि तीरथ सिंह गंगोत्री से चुनाव लड़ेंगे। आम आदमी पार्टी ने तो यहां उनके खिलाफ अपना कैंडिडेट कर्नल अजय कोठियाल को बना दिया है।
विधानसभा चुनाव को लेकर क्या स्थिति है?
सूत्रों ने बताया कि उत्तराखंड उपचुनाव को लेकर अभी भी चुनाव आयोग को फैसला करना बाकी है। सूत्र ने कहा कि ये चुनाव कोरोना संक्रमण के हालात पर ही निर्भर करते हैं। हालांकि, अभी इसके लिए तीरथ सिंह रावत के पास करीब-करीब दो महीने का समय है।