चीन ने LAC पर बना लिए हवाई अड्डे, मोदी चुप, कांग्रेस भी डरी है: स्वामी

नई दिल्ली। भारत और चीन के सैनिकों के बीच पिछले साल जून में लद्दाख में हुई झड़प को एक साल पूरा हो गया है। हालांकि, अब तक चीनी सेना के LAC से पीछे हटने की पुष्टि भी नहीं हो पाई है। इस बीच आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के मुद्दे पर अपनी ही सरकार को लगातार घेरने वाले भाजपा सांसद सु्ब्रमण्यम स्वामी ने इस बार कांग्रेस को भी नहीं बख्शा है। एक तरफ उन्होंने लद्दाख में चीन को आक्रामणकारी न मानने के लिए मोदी सरकार पर निशाना साधा, वहीं कांग्रेस पर पुराने भेद खुलने के डर को लेकर हमला बोला।

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क्या बोले सुब्रमण्यम स्वामी?:

दरअसल, ट्विटर पर एक यूजर ने गुरुवार को भाजपा सांसद से पूछा था कि अमेरिका के ब्लू डॉट नेटवर्क (दुनियाभर में अमेरिका के व्यापारिक मार्ग बनाने की योजना) को चीन की बेल्ड एंड रोड योजना का विकल्प पर देखा जा सकता है? इस पर स्वामी ने जवाब देते हुए मोदी सरकार को ही घेर लिया। उन्होंने लिखा, “पहले तो भारत को फैसला करना होगा कि वह क्वाड (Quad) के साथ मजबूती से खड़ा है। इसके बाद वह ब्लू डॉट नेटवर्क के प्रस्ताव को स्वीकार कर सकता है।

स्वामी ने आगे कहा, “लेकिन मोदी अभी भी यह निर्धारित करने में डंवाडोल नजर आ रहे हैं कि हम किसकी तरफ हैं, क्योंकि भारत ने अब तक लद्दाख में चीन को आक्रमणकारी नहीं माना है। अब तो चीन ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के करीब एयरपोर्ट्स तैयार कर लिए हैं और शायद डेपसांग में एक हेलिपैड भी।

कांग्रेस पर हमलावर हुए स्वामी:

सुब्रमण्यम स्वामी यहीं नहीं रुके। उन्होंने विपक्षी दल पर चीन की आक्रामकता और केंद्र सरकार को न घेरने को लेकर सवाल उठाया। अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा, “क्या कांग्रेसी नेताओं ने लद्दाख में चीन के आक्रमणकारी होने की आलोचना की है? मैंने सिर्फ कुछ कमजोर बयान सुने हैं, लेकिन किसी कांग्रेसी ने चीनी आक्रमकता की आलोचना करते हुए नीतिगत बयान नहीं जारी किया है। क्या उन्हें इस बात का खुलासा होने का डर है कि डेपसांग पर चीन ने यूपीए शासन के दौरान कब्जा किया था?

LAC पर चीन की आक्रामकता पर पहले भी चेता चुके हैं स्वामी: 
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है, जब भाजपा सांसद ने चीन की आक्रामकता का जवाब न दे पाने के लिए मोदी सरकार पर निशाना साधा है। एक दिन पहले ही उन्होंने गलवान घाटी मुठभेड़ के एक साल पूरा होने को लेकर सरकार पर तंज कसा था।

उन्होंने पूछा था कि पुलवामा याद है, गलवान भूल गए, क्योंकि कोई आया नहीं, कोई गया नहीं। उन्होंने लिखा कि क्या यह खेदजनक नहीं है कि साल दर साल पुलवामा को पीएम, रक्षा मंत्री, गृहमंत्री याद करते हैं, लेकि हमारे जवानों द्वारा चीनी पीएलए के खिलाफ प्रदर्शित असाधारण बहादुरी को भुला दिया गया है।

इससे कुछ दिनों पहले ही स्वामी ने लद्दाख से भारत और चीनी सेना के पीछे हटने को लेकर भी तंज कसा था। उन्होंने एक ट्वीट में कहा था कि अब मुझे महसूस हो रहा है कि एलएसी से सिर्फ भारत ने ही वापसी की, जबकि चीन और आगे बढ़ गया। स्वामी भारत और भूटान की जमीन पर चीन के कब्जे का मुद्दा उठाकर मोदी सरकार पर डरपोक बनने का आरोप भी लगा चुके हैं।

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