लखनऊ। अपने बगावती रूख से भाजपा के लिए मुसीबत बन चुके भाजपा की ही सरकार के प्रदेश मंत्री ओमप्रकाश राजभर लगातार अपनी ही पार्टी पर हमलावर होते जा रहे है। उल्लेखनीय है कि उन्होने अपनी मांगों को पूरा किए जाने की डेडलाइन दे रखी है और वार्निंग भी दी है कि अगर तय तारीख तक उनकी मांगे पूरी नहीं की जातीं तो वह भाजपा से समर्थन वापस ले लेंगे। आज हरदोई पहुंचे ओपी राजभर एक बार फिर भाजपा पर हमलावर दिखे। उन्होने कहा कि सरकार को आरक्षण देना होगा वरना लोकसभा चुनाव मुश्किल में पड़ेगा। उन्होने कहा कि गरीबों की शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के 3 लाख 18 हजार रिक्त शिक्षकों के पद आउटसोर्सिंग से भरें जाए, ऐसा प्रदेश में नया कानून बनाया जाए। जिससे न सिर्फ मात्र पांच हजार पाने वाला शिक्षकों के परिश्रम से स्कूल मॉडल बन आएंगे बल्कि 60 हजार रुपए एक शिक्षक पर खर्च कर गुणवत्तायुक्त शिक्षा का सपना देखने वाली सरकारों की निंद्रा भी टूटेगी।
उन्होंने कहा कि इस नए कानून से गरीबों की शिक्षा के गिरते स्तर को उठाने का काम किया जाएगा। यदि शिक्षक बेहतर करेगा तो प्रत्येक वर्ष उसका मानदेय बढ़ेगा वरना निकालकर दूसरों को मौका दिया जाएगा। पिछड़े समाज के बेटा बेटियों को प्राइमरी विद्यालयों में ही गुणवत्ता युक्त शिक्षा मिलेगी। यही नहीं आज जो प्राइमरी टीचर खुद 60 हजार वेतन पाकर उस मांटेसरी स्कूल में अपने बच्चों को भेज रहा है जहां का शिक्षक मात्र पांच हजार मानदेय पा रहा है। वह भी कुछ समय बाद अपने बच्चों को प्राइमरी में दाखिला कराएगा, लेकिन इस प्रस्ताव पर 46 मंत्री एक तरफ है लेकिन वह अकेले।
कैबिनेट मंत्री ने अपने संबोधन में बसपा सुप्रीमो मायावती और मुलायम का नाम लेकर यह भी कहा कि जनता के वोटों पर डाका डालने के लिए पार्टियां गठबंधन कर रहीं हैं लेकिन वह जातियों को आपस में मिलाकर एक सशक्त संगठन बनाना चाहते हैं। जिसके बाद निचले दबके में पहुंच चुके समाज को माया मुलायम आदि के समक्ष भीख नहीं मांगनी होगी। प्रेस वार्ता में कैबिनेट मंत्री ने कहा कि गंगा सफाई के नाम पर सरकार ने करोड़ों रुपये पानी में बहा दिए। यदि यही गरीबों की शिक्षा पर खर्च होता तो उसका असर दिखता। शहरों के नाम बदलने से भी बहुत कुछ सरकारों को हासिल नहीं होने वाला। संबोधन के दौरान ही उन्होंने कहा कि दो दिन पहले उन्होंने सपा के नेताओं पर बयान दे दिया तो उस पर सपा सहित भाजपा में भी बवाल हो गया।
उल्लेखनीय है कि राजभर अपने बयानों से कई बार अपनी ही सरकार पर हमले बोलकर सरकार के लिए मुसीबत खड़ी कर चुके है। राजभर कई बार आरोप लगा चुके हैं कि सरकारी मशीनरी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना नहीं मान रही है और विधायकों और सांसदों की बात भी नहीं सुन रही है और अपनी ही मनमानी कर रही है।