अनसुलझे सवालः स्विस बैंक से कहां गया पैसा? किसने निकाला?

लेखक-अजित वर्मा

हमारे केन्द्रीय वित्तमंत्री गोयल द्वारा पिछले दिनों दिये गए इस बयान की ओर सबका ध्यान गया है कि स्विस बैंक में भारतीयों के जमा धन में 34 फीसदी की गिरावट आई है। वित्त मंत्री के अनुसार स्विस बैंक ने भारत सरकार को भारतीयों के जमा धन की जानकारी देते हुए कहा है कि सभी जमा पैसा कालाधन नहीं है। वित्त मंत्रालय ने स्विस बैंक से खातों में जमा हुए कालेधन के बारे में जानकारी मांगी थी। कहा जा रहा है कि स्विस बैंक ने भारत सरकार को सूचित किया है कि स्विस बैंक में जमा रकम में 34 फीसदी की कमी आई है। इसके पहले जो जानकारी सामने आई थी उसमें स्विस बैंकों में भारतीयों के धन के बढ़ने की बात पता चला थी। इससे जुड़ा जो डाटा पहले रिलीज़ किया गया था उसमें वो ट्रांजेक्शन भी शमिल थे जो भारतीय बैंकों की शाखा के ज़रिए किए गए हैं और जो भारत की राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखाओं से स्विस बैंक की शाखाओं में ट्रांसफर हुए हैं।

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दरअसल, स्विस बैंक में जमाधन भारत के लिए एक ऐसी पहेली बना रहा है, जो भारत की राजनीति में वर्षों से तहलका मचा रही है। यहाँ तक कि प्रधानमंत्री पद हासिल करने की लालसा में भी श्री नरेन्द्र मोदी से लोगों तक के खाते में 15 लाख रुपये जमा होने वाला वह “जुमला” उछलवा दिया, जो आज तक उनका पीछा कर रहा है। लोगों को रह रहकर रजत शर्मा की अदालत में एक आँख वाले नौटंकीबाज भगवावेशधारी का नाटक याद आता है जब वह दर्शक दीर्घा के लोगों से पूछता था कि आपको 15 लाख चाहिए कि नहीं? आपको 30-35 लाख रु. प्रतिलीटर पेट्रोल और 300-350 रु. प्रति सिलिण्डर गैस चाहिए कि नहीं। जो ये देने की बात कर रहा है, उसे वोट देंगे कि नहीं? यही नौटंकीबाज आपको स्विस बैंक में भारतीयों का कालाधन लाखों करोड़ होने की बात करता था। अब जब पता चल रहा है कि स्विस बैंकों में भारतीयों का इतना धन है ही नहीं तो न केवल मोदी और उनके चहेते बाबा को ही नहीं, यह मुद्दा उठाने वाले शरद यादव, लालकृष्ण आडवाणी और अरुण जेटली को बताना चाहिए कि लाखों करोड़ का यह कालाधन आखिर कहाँ गया? किस खोह में या किस गुफा में चला गया? और अगर इतना धन था ही नहीं तो इसकी सूचना इन महानुभावों को दी किसने?

 

 

और, अब केन्द्रीय वित्तमंत्री का यह ताजा बयान! अब तो अधिकृत रूप से कहा जा रहा है कि स्विस बैंक में भारतीयों के जमा धन में 34 फीसदी की गिरावट आयी है, तो स्वाभाविक यह गिरावट कैसे आयी? यह धन कहाँ गया और किसी ने धन निकाला तो वह कौन है, जिसने यह धन निकाला? फिर यह सवाल तो अब भी अपनी जगह ही है कि स्विस बैंक जमा भारतीयों का काला धन था कितना और किसने जमा किया था? अब गिरावट आने के बाद कितना धन खातों में बचा है? कुछ तो बताएं लोग या जुमले ही उछालते रहेंगे?

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