नई दिल्ली । भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का भरोसा दिलाया था। वह इसमें सफल होती भी दिख रही है। रिपोर्ट के मुताबिक लेकिन उनकी सरकार आने से पहले से ही किसानों को काफी फायदा हो रहा था। उल्लेखनीय है कि सन 2011-12 से लेकर सन 2015-16 के दौरान फलों और सब्जियों के उत्पादन से किसानों को तुलनात्मक रूप से ज्यादा लाभ हुआ है। इन पांच साल में फलों और सब्जियों के मूल्य में काफी बढ़ोतरी हुई है, जिससे किसानों को लाभ मिला है। सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के अनुसार इस दौरान मोटे अनाज के उत्पादन पर किसानों को अधिक लाभ नहीं मिल सका। फलों और सब्जियों का उत्पादन मूल्य के हिसाब से 2011-12 के 2.71 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2015-16 में 3.17 लाख करोड़ रुपये हो गया।
उल्लेखनीय है कि ‘कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के उत्पादन का मूल्य 2011-12 से 2015-16’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि मोटे अनाज, तिलहन और रेशा समूहों का उत्पादन मूल्य इस दौरान मामूली रूप से घटा। स्थिर मूल्य पर 2011-12 में मोटे अनाजों का उत्पादन मूल्य के हिसाब से 3.36 लाख करोड़ रुपए था, जो 2015-16 में घटकर 3.25 लाख करोड़ रुपए रहा था। इन सालों में 2012-13 में मोटे अनाज से रिटर्न 3.31 लाख करोड़ रुपए, 2013-14 में 3.4 लाख करोड़ रुपए ओर 2014-15 में 3.26 लाख करोड़ रुपये रहा। तिलहन ओर रेशा श्रेणी में भी प्रतिफल घटा। साथ ही उनकी हिस्सेदारी भी घटी है। वित्त वर्ष 2015-16 में कृषि फसलों के कुल मूल्य में 27 प्रतिशत योगदान मोटे अनाज का और फलों तथा सब्जियों का योगदान 26 प्रतिशत रहा है। अब मोदी सरकार की बारी है कि वह किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए क्या कोशिश करती है। इस बारे में उनके साथ ही उनके मंत्रियों के भी बयानों में किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने की बात कही जा रही है।