‘बाबा बर्फानी के दर्शन करने के बाद हम लोग दोस्तों के साथ गुफा के नीचे बने कैंप में रेस्ट कर रहे थे। अचानक से जोर से सैलाब आने की आवाज आई और गुफा के बायीं तरफ ऊपर से बर्फ के झरने से बाढ़ के पानी की मोटी धार गिरने लगी। पानी का बहाव हमारे बगल वाले कैंप की तरफ आ गया। मैंने एक दुकाने वाले के पीछे भागना शुरू किया। मेरे आंखों के सामने ही हमारे सामने वाले कैंप में रेस्ट कर रहे लोग बह गए, कुछ टैंट वाले लोग भी बह गए हैं। कई घोड़े वाले भी इसी सैलाब में बहे हैं। मेरी जिंदगी सिर्फ एक मिनट के फासले से बची है।’
अमरनाथ गुफा के पास हुए बादल फटने और तबाही के बाद वहां से कुछ लोग अपनी जान बचाने के लिए पैदल ही बेस कैंप की तरफ चल पड़े। शुभम गर्ग भी उन चंद लोगों में से हैं जिन्होंने अपनी आंखों से इस तबाही को देखा और अपनी जान बचाकर लौटे हैं। अब तक इस हादसे में 15 लोगों की मौत हुई हैं और करीब 35-40 लोग लापता हैं। राहत और बचाव कार्य जारी है, हालांकि अभी अमरनाथ यात्रा को स्थगित कर दिया गया है।
‘एक लड़की के मां-पिता दोनों बह गए’
शुभम गर्ग आगे बताते हैं कि ‘कुछ आर्मी के जवानों ने लोगों को बचाने की कोशिश की लेकिन सैलाब इतना ज्यादा था कि कुछ आर्मी के जवान भी मेरी नजरों के सामने बहे हैं। मैंने देखा कि एक लड़की के मां और पिता दोनों बह गए और वो रोती रह गई। आर्मी के जवानों ने उस बच्ची को बचाया और उसे सुरक्षित कैंप में ले गए। अभी भी ऊपर कई लोग फंसे हुए हैं। बालटाल वाला रास्ता बहुत ज्यादा खराब हो गया है, लेकिन मैं रात भर बिना रुके 16 किमी पैदल चलकर वापस आया हूं।’
‘भंडारे का पूरा टेंट सैलाब बहा ले गया’
मेरठ के रहने वाले जतिन का अमरनाथ की पवित्र गुफा के ठीक नीचे ही भंडारा है। यहां रोजाना हजारों लोग खाना खाते हैं। जतिन को किसी काम से नीचे आना था तो वो शाम को करीब 5 बजे गुफा से निकला। मेरे निकले के कुछ देर बाद ही ये हादसा हो गया।
मुझे पीछे से तेज आवाज आई, हमारे साथ जितने लोग थे वो और तेजी से पहाड़ उतरने लगे। मैं कुछ मिनट के लिए अगर रुक जाता तो मैं भी इस हादसे का शिकार हो सकता था। हमारा मेरठ का विशाल भंडारा गुफा के ठीक नीचे ही था, भंडारे का पूरा टेंट बह गया है।
8 जुलाई को ही दर्शन करने वालों में जम्मू के रहने वाले रमेश कौल भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि जिस दिन ये हादसा हुआ वो भी अमरनाथ गुफा में दर्शन करने के लिए गए थे, लेकिन शाम होने के पहले ही वो बालटाल बेस कैंप की तरफ लौट गए।
पहलगाम और बालटाल बेस कैंप में श्रद्धालुओं का जमावड़ा
शुक्रवार को पवित्र गुफा के पास आए सैलाब के बावजूद अमरनाथ यात्रा के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं की हिम्मत में कोई कमी नहीं आई है। शुक्रवार की देर रात को जम्मू बेस कैंप से तीर्थयात्रियों का एक जत्था कश्मीर के बालटाल और पहलगाम बेस कैंप के लिए रवाना हुआ।
जम्मू से तीर्थ यात्रियों के 279 व्हीकल कॉन्वॉय में रवाना किए गए थे। हालांकि स्थानीय लोगों ने इसे प्रशासन का मिस मैनेजमेंट कहा है। उनका कहना है कि जम्मू के भगवतीपुर बेस कैंप में यात्रियों की तादाद ज्यादा हो गई थी, इसलिए यात्रा स्थगित होने के बावजूद तीर्थ यात्रियों को बालटाल और पहलगाम के लिए रवाना कर दिया गया।

भले ही फिलहाल अमरनाथ यात्रा को स्थगित कर दिया गया है, लेकिन 9 जुलाई को भी जम्मू से बालटाल और पहलाम बेस कैंप के लिए अमरनाथ यात्रियों के जत्थों को रवाना किया गया है, लेकिन इन जत्थों को बेस कैंप से आगे नहीं बढ़ने दिया जा रहा। पहलगाम में नुनवान बेस कैंप के बाहर यात्रियों की भारी भीड़ लग गई है। लेकिन किसी को भी यात्रा के लिए अनुमति नहीं दी जा रही है।
महाराष्ट्र के पुणे से आए चेतन पहलगाम में बेसकैंप के बाहर लाइन में खड़े हैं उन्होंने भास्कर को बताया कि ‘अमरनाथ हादसे की खबर के बाद यात्रियों में थोड़ा डर घर कर गया है। लेकिन हर कोई भोले बाबा का नाम लेकर अपनी आगे की यात्रा करना चाहते हैं।’
पवित्र गुफा के एक-दो किमी के दायरे में फटा बादल
अमरनाथ गुफा के पास शुक्रवार शाम 5 बजकर 30 मिनट बादल फटा था। जिस समय बादल फटा, उस समय गुफा के पास 10 से 15 हजार श्रद्धालु मौजूद थे। इस घटना में मरने वालों में 3 महिलाएं भी शामिल हैं। ITBP ने बताया कि 15 हजार लोगों को पवित्र गुफा के पास से सुरक्षित पंचतरणी ले जाया गया है।
बादल फटने के कारण पहाड़ों से तेज बहाव के साथ आए पानी से श्रद्धालुओं के लिए लगाए गए करीब 25 टेंट और दो से तीन लंगर बह गए। बारिश से पूरे इलाके में तेजी से पानी भर गया और कई लोग इसकी चपेट में आ गए। कई श्रद्धालु लापता हैं और उनके तेज बहाव में बहने की आशंका है।