नई दिल्ली। अगर आपने अब तक 2020-21 के लिए टैक्स सेविंग इन्वेस्टमेंट शुरू नहीं किया है तो इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम यानी ELSS में निवेश करना आपके लिए फाएदेमंउ साबित हो सकता है। टैक्स बचाने और बेहतर रिटर्न पाने के लिए आप टैक्स-सेविंग म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड की इस स्कीम में निवेश करने पर इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत 1.5 लाख रुपए तक टैक्स छूट का लाभ ले सकते हैं।
3 साल का लॉक-इन
ELSS में 3 साल का लॉक-इन पीरियड रहता है यानी आप जो पैसा इसमें इन्वेस्ट करेंगे वो 3 साल बाद ही निकाल सकेंगे। यह इस स्कीम का एक बहुत ही अच्छा फीचर है। अन्य स्कीम्स की तुलना में इसका लॉक-इन पीरियड काफी कम है। हालांकि यह लॉक इन पीरियड समाप्त होने के बाद निवेशक इसे जारी रख सकता है। ELSS में लम्बे समय के लिए निवेश करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।
500 रुपए से कर सकते हैं निवेश की शुरुआत
ELSS में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP या सिप) के जरिए 500 रुपए से भी निवेश की शुरुआत की जा सकती है। वहीं अधिकतम की कोई सीमा नहीं है। निवेशकों को इन फंड में दो तरह के ऑप्शन मिलते हैं। इनमें पहला है ग्रोथ और दूसरा है डिविडेंड पे आउट। ग्रोथ ऑप्शन में पैसा लगातार स्कीम में रहता है।
दो तरह से ले सकते हैं फायदा
डिविडेंड ऑप्शन में कंपनियां समय-समय पर लाभांश के रूप में फायदा बांटती रहती हैं। डिविडेंड ऑप्शन वाली योजनाओं में साल में एक बार डिविडेंड मिल सकता है। हालांकि कुछ योजनाओं ने तो साल में एक बार से ज्यादा डिविडेंड दिया है।
सेक्शन 80 सी के तहत टैक्स छूट
एक वित्त वर्ष में आप 1.5 लाख रु तक निवेश पर इनकम टैक्स एक्ट सेक्शन 80 सी के तहत टैक्स छूट का लाभ उठा सकते हैं। इसके अलावा ELSS में निवेश पर होने वाला लाभ और रिडम्पशन (निवेश यूनिट को बेचना) से मिलने वाली राशि भी पूरी तरह टैक्स फ्री होती है।
1 लाख रुपए तक कोई टैक्स नहीं
म्यूचुअल फंड से एक साल में मिलने वाले 1 लाख रुपए तक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) को आयकर से छूट है। यानी आपको 1 लाख रुपए तक कोई टैक्स नहीं देना होता है। इस सीमा से अधिक लाभ पर 10% की दर से टैक्स देना होता है।
इसमें कैसे कर सकते हैं निवेश?
म्युचुअल फंड में 4 तरह से निवेश किया जा सकता है। इसमें पूरी तरह से ऑनलाइन से लेकर फार्म भरकर निवेश किया जा सकता है। म्युचुअल फंड में लगाया गया पैसा शेयर बाजार में लगाया जाता है। इसलिए कई लोगों को लगता है कि इसके लिए डीमैट अकाउंट जरूरी है, हालांकि ऐसा नहीं है। म्युचुअल फंड में निवेश बिना DEMAT अकाउंट के भी निवेश किया जा सकता है। इन 4 तरीकों से कर सकते हैं निवेश…
पहला तरीका : यह तरीका काफी आम है। इसमें किसी एजेंट के माध्यम से निवेश करना होता है। अगर एजेंट को खोजने में दिक्कत हो तो जिस कंपनी में निवेश करना चाहते हैं उस कंपनी की वेबसाइट से टोल फ्री नम्बर लेकर बात कर सकते हैं। कंपनी आपके इलाके में जो एजेंट हैं उससे संपर्क करा देगी। फिर इस एजेंट की मदद से आप निवेश कर सकते हैं।
दूसरा तरीका : ब्रोकर या किसी म्युचुअल फंड बेचने वाली वेबसाइट के माध्यम से भी निवेश किया जा सकता है। कई लोग शेयर बाजार में निवेश करते हैं वह अपने ब्रोकर अकाउंट के माध्यम से भी म्युचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। इसके अलावा देश में एक दर्जन से ज्यादा वेबसाइट हैं जो म्युचुअल फंड बेचती हैं। लोग इन वेबसाइट पर अपना रजिस्ट्रेशन कराने के बाद म्युचुअल फंड खरीद सकते हैं। अगर जरूरत हो तो यह वेबसाइट अपने एजेंट भी निवेशक के पास मदद के लिए भेजती है।
तीसरा तरीका : डायरेक्ट प्लान में निवेश। सेबी के आदेश के बाद सभी म्युचुअल फंड कंपनियां अपनी सभी स्कीम्स में डायरेक्ट प्लान का ऑप्शन देती हैं। इनमें निवेश पूरी तरह से ऑनलाइन होता है। आप म्युचुअल फंड कंपनी की वेबसाइट पर जाकर सीधे स्कीम चुनते हैं और कुछ स्टेप में निवेश की प्रक्रिया पूरी करते हैं। यहां पर पेमेंट भी ऑनलाइन करना होता है।
चौथा तरीका : अब पेटीएम मनी ऐप की मदद से आप किसी भी म्युचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। पेटीएम मनी ऐप की मदद से आप निवेश करने के साथ-साथ अपने पोर्टफलियो को भी आसानी से चेक कर सकते हैं। इसके लिए आपको अलग से कोई कमीशन या फीस नहीं देनी होगी।
टैक्स सेविंग के साथ बेहतर रिटर्न पाने के लिए ELSS एक अच्छा विकल्प
इस सवाल के जवाब में पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट और ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के फाउंडर और सीईओ पंकज मठपाल कहते हैं कि इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम यानी ELSS के कई फंड्स ने बीते 1 साल में 70% से ज्यादा का रिटर्न दिया है। इसके अलावा इसमें निवेश करने पर एक वित्त वर्ष में आप 1.5 लाख रु तक के निवेश पर इनकम टैक्स एक्ट सेक्शन 80 सी के तहत टैक्स छूट का लाभ उठा सकते हैं। इसीलिए ये अच्छा रिटर्न पाने और टैक्स बचाने का शानदार ऑप्शन है।