प्रयागराज। जिले के गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी संगम तट पर शनिवार को माघी पूर्णिमा पर मास पर्यंत कल्पवास की आखिरी डुबकी के लिए आस्था का जन ज्वार एक बार फिर उमड़ पड़ा। हर किसी की चाह संगम की अमृतमयी पावन धारा के स्पर्श से जीवन को धन्य बना लेने की थी। मिलन, हरि दर्शन और रेती पर यज्ञ, अनुष्ठानों के समागम का यह अवसर देखने लायक था। माघी पूर्णिमा की आखिरी डुबकी के साथ संत, भक्त और कल्पवासी विदा होने लगे हैं।
माघी पूर्णिमा स्नान के लिए आधी रात से ही संगम समेत गंगा के अन्य स्नान घाटों पर आस्था का जन सैलाब हिलोरें मारने लगा। सुबह पौ फटने तक संगम की ओर जाने वाले मार्गों पर हर तरफ रेला नजर आने लगा। भक्ति के सागर में की लहरों के उफान में हर कोई भीगता और तन, मन को अभिसिंचित करता रहा। माघ मेला क्षेत्र के सभी आठ घाटों पर माघी पूर्णिमा की पावन डुबकी लगाने के साथ रेती पर कामनाओं के दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ ही अन्न, वस्त्र दान की भी हर तरफ होड़ सी मची रही।

भीड़ को देखते हुए शाम को ही वाहनों का प्रवेश संगम क्षेत्र में रोक दिया गया। लाल मार्ग, काली मार्ग और त्रिवेणी मार्ग पर सिर्फ भक्ति भाव में रमे आस्थावानों का रेला चल रहा है। स्नान, ध्यान के साथ रेती पर सत्यनारायण भगवान की कथाएं हो रही हैं। शिविरों में भी महीने भर से चल रहे यज और कथाओं, अनुष्ठानों की पूर्णाहुति शुरू हो गई। शिविरों से सामान समेटे जाने लगे हैं।
संगम पर संतो भक्तों पर हेलीकॉप्टर से फूलों की बारिश
माघी पूर्णिमा के पावन पर्व पर एक तरफ जहां आस्था काजल सागर हिलोरे मारता रहा वहीं दूसरी ओर योगी आदित्यनाथ सरकार की ओर से संगम तट पर संतो भक्तों पर फूलों की बारिश कराई गई । हेलीकॉप्टर से सुबह 8:30 बजे से पुष्प वर्षा आरंभ हो गई और जयघोष गूंजने लगा। कल्पवासियों की आखरी डुबकी को योगी सरकार ने सुखद और भावपूर्ण बनाने की कोशिश की। गुलाब की पंखुड़ियां लेकर सुबह से ही पुलिस लाइन से हेलीकॉप्टर संगम के लिए उड़ान भरने लगा।
संगम की रेती पर संत समाज से एकजुटता का आह्वान
माघी पूर्णिमा पर शनिवार को अखिल भारतीय संयुक्त धर्माचार्य मंच की एक बैठक माघ मेला क्षेत्र में गुरु कृपा शिविर में मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष महामंडलेश्वर महंत बालेश्वर दास की अध्यक्षता मे हुई।बैठक में मंच के अध्यक्ष महामंडलेश्वर महंत बालेश्वर दास जी महाराज सहित अनेक संत महंतों ने संत समाज से आग्रह किया कि संत समाज आपसी मतभेदों और विवादों को भुला कर समाज हित मे कार्य करें। संतों के आपसी झगड़े से समाज मे संत समाज की छवि खराब हो रही है।