लखनऊ। यूपी के एटा में पांच लोगों की हत्या में जो जहरीला पदार्थ प्रयोग किया गया वह काफी जहरीला था। जब यह सभी लोग बेहोश हो गए, तब उनके गले दबे दबाए गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गले दबाने की तो पुष्टि हुई है, लेकिन मौत का कारण गला दबाना नहीं है। जिंदा रहने पर ही दबाने पर कोई निशान पड़ सकता है। पांच लोगों की मौत की गुत्थी को सुलझाने में पुलिस की टीमें दिन रात काम कर रही हैं। करीब-करीब पुलिस को सफलता मिल ही गई है। दिव्या और बुलबुल के फोनों ने बहुत कुछ आसान कर दिया। सबसे अधिक सहायता फेसबुक के मैसेंजर ने की है।
पिछले तीन दिन से दो टीमें सिर्फ इन्हीं पढ़कर जानकारी जुटा रही हैं। जो जानकारी मिली वह घटना खोलने के लिए पर्याप्त मानी जा है। वहीं दो लोग हिरासत में लिए गए हैं। वह भी पुलिस की जानकारी की पुष्टि कर रहे हैं। पूरे परिवार की फेसबुक को भी पुलिस ने खंगाला है। इसमें कुछ ऐसे तथ्य मिले हैं जो दिव्या को आत्महत्या करने की ओर इशारा कर रहे हैं। इसकी जानकारी नजदीकी लोगों को भी है। यह बता भी बताया जा रहा है। दिव्या काफी समय से वह तनाव में थी। तनाव में बढ़ रहे गुस्से के कारण ही उसने पूरे दिन खाना नहीं खाया था। इस गुत्थी तक पुलिस के हाथ पहुंच गए हैं। बस एक दो दिन में इसका पूरा खुलासा कर दिया जाएगा। इसमें पुलिस यह भी बता देगी कि परिवार में जो कलह थी वह क्या थी। पुलिस की दो टीमें जो प्रदेश से बाहर गई हैं वह अभी लौटी नहीं हैं। इनके पास भी तथ्य बताए जा रहे हैं।
किसने घर में पहुंचाया जहर
एटा। पांचों को जहर देने की भी पुष्टि हुई है। एक वर्ष के आरव के होठ और मुंह पर भी जहर मिला है। सूत्रों की मानें तो जो जहर दिया गया है वह सल्फास जैसा ही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जो बदबू की बात कही गई है वह लहसुन जैसी दुर्गंध है। इस घटना के लिए तैयारियां कर ली गई थी। सवाल यह है कि आखिर जहर लाकर किसने दिया। लॉकडाउन के चलते घर से निकलना बंद था। ऐसे में वह कौन व्यक्ति था जिसने घर में जहर पहुंचाया।
राहुल कुमार, एएसपी क्राइम का कहना है कि अभी जांच चल रही है। कुछ चीजें मिली हैं। सभी के तथ्यों को एकत्रित कर मिलान किया जाएगा। कुछ टीमें बाहर हैं। वह भी नहीं आई हैं। संभावना है कि दो-तीन दिन में खुलासा हो जाएगा। दोषी सलाखों के पीछे होगा।
वहीं इससे पहले दिव्या के पति दिवाकर ने पुलिस के इस खुलासे को सिरे से नाकार दिया था। दिवाकर ने कहा था कि दिव्या ऐसा कर ही नहीं सकती। पांचों की हत्या हुई है। किसी ने परिवार को खत्म करने के लिए इस घटना को अंजाम दिया है। इस मामले में सीबीआई जांच होनी चाहिए। एसएसपी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि चारों लोगों की हत्या करने के बाद दिव्या पचौरी ने आत्महत्या कर ली है।
दिवाकर की शाम को हुई थी बात
दिवाकर पिछले 12 वर्षों से रुडकी में एक दवा की कंपनी में काम करते है। सुबह शाम रोजना परिवार में बात होती है। वह लॉकडाउन से पहले ही घर पर आए थे। शुक्रवार की शाम करीब आठ बजे दिवाकर ने फोन किया तो पिता राजेश्वर प्रसाद से बात हुई थी। वहीं उनके भाई कलक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद पचौरी घर पर गए थे। वह करीब साढ़े सात बजे उनके घर से आए है। उस समय तक घर का माहोल काफी अच्छा था।
पांच मौतों के बाद बचा इकलौता दिवाकर
घर में पांच मौतों के बाद अब सिर्फ मृत रिटायर्ड स्वास्थ्य कर्मी राजेश्वर प्रसाद पचौरी के इकलौते बेटे दिवाकर पचौरी बचे हैं। वे रुड़की में नौकरी करते हैं। परिवार खोने के बाद उनकी भी हालत किसी से देखी नहीं जा रही। वे कभी शांत हो जाते हैं तो कभी दो मासूम बच्चों का नाम ले बिलखने लगते हैं। नम आखों से लोग उन्हें ढांढ़स बंधाने में लगे हैं।
क्या है पूरा मामला :
एटा में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत से कोहराम मच गया था। कोतवाली नगर के मोहल्ला शृंगार नगर में रिटायर्ड स्वास्थ्यकर्मी राजेश्वर प्रसाद पचौरी (75) पुत्र रामप्रसाद पचौरी रहते थे। उनकी पुत्रवधू दिव्या (35) पत्नी दिवाकर, नाती आरुष (8) आरव (एक) रहते थे। कुछ दिन पूर्व बेटे की साली बुलबुल निवासी सोनई (23) निवासी सोनई, हाथरस भी आ गई थी। शनिवार सुबह दूध देने के लिए महिला आई थी। महिला ने गेट खटखटाया तो कोई आवाज नहीं आई। उसने अंदर झांककर देखा तो गेट के पास ही चारपाई पर दिव्या की लाश पड़ी दिखाई दी। यह देख वह चीख निकल गई। इस मामले की जानकारी आसपास के लोगों को दी गई। पूरा मोहल्ला जमा हो गया। अंदर से ताला बंद होने के कारण कुछ पता नहीं चल सका। सूचना मिलने पर पुलिस पहुंच गई। तब तक परिवार के अन्य लोग भी पहुंच गए। पुलिस ने गैस कटर से गेट काटकर अंदर जाकर देखा तो सभी मृत पड़े थे। यह हाल देख कोहराम मच गया।
पुलिस की आंखों-देखी :
पुलिस अधिकारियों की मानें तो मुख्य गेट के पास महिला दिव्या का शव मिला था। दिव्या के मुंह से झाग निकल रहा था। पुलिस ऊपर वाले कमरे में पहुंची। बुलबुल का शव चारपाई पर मिला। जिसके गले पर निशान थे। अगले कमरे में पहुंची। दोनों बच्चों के शव मिले। बड़े बेटे आरुष के मुंह से झाग निकल रहा था तो वही चेहरे पर खून के निशान भी थे। छोटे बेटे के मुंह से झाग निकल रहा था। इसके साथ ही राजेश्वर प्रसाद पचौरी के कमरे में पहुंचे। वह भी मृतवस्था में पड़े मिले। अलग-अलग चोट, शव मिलने की स्थिति को लेकर पुलिस और अधिकारी भी उलझन में थे।