कुश्ती संघ के संघर्ष में सियासत… बृजभूषण और दीपेंद्र की आखिर अदावत क्या है?

चंडीगढ़: भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर इस्तीफे की तलवार लटक रही है। कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडलिस्ट विनेश फोगाट ने कुश्ती संघ के अध्यक्ष पर कई महिला खिलाड़ियों के यौन शोषण का आरोप लगाया है। उन पर अपने हिसाब से नियम-कानून बदलने और तानाशाही के भी आरोप हैं। आरोपों की फेहरिस्त के बीच एक आवाज यह भी उठी कि यह हरियाणा लॉबी और उत्तर प्रदेश लॉबी के बीच कुश्ती संघ पर कब्जे की जंग है।

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अब भले ही ये मामला सीधे तौर पर सियासत से न जुड़ा हो लेकिन कुश्ती संघ को करीब से जानने वालों को पता है कि एक जमाने में हरियाणा का संघ पर वर्चस्व रहा है। बृजभूषण शरण सिंह ने जब सबसे पहली बार भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष का चुनाव जीता था तो उन्होंने कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा को शिकस्त दी थी। दीपेंद्र हुड्डा यानी हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पुत्र और राज्यसभा सांसद।आइए जानते हैं बृजभूषण सिंह और दीपेंद्र हुड्डा की अदावत की कहानी।

कुश्ती संघ में प्रतिद्वंद्विता और पॉलिटिक्स पर आगे बढ़ें उससे पहले बात दीपेंद्र हुड्डा के बयान की। बृजभूषण सिंह पर सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए हुड्डा ने कहा, ‘ये कोई साधारण घटना नहीं है। खेल जगत के लिए यह एक भयंकर दुर्घटना है। ये पूरे देश से संबंधित बात है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई इंक्वायरी हो। समय तय किया जाए इंक्वायरी का। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा था।

आज वो नारा खोखला दिखाई दे रहा है। देश की बेटियों की भलाई के लिए सरकार तुरंत कार्रवाई करे। इस प्रकार के कांड के बाद भी सरकार अगर नहीं जागी तो कौन माता-पिता अपनी बेटियों को प्रोत्साहित करेगा। वे आज अपने मान-सम्मान के साथ ही करियर को दांव पर लगाकर इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं।’

अब बात दीपेंद्र हुड्डा और बृजभूषण शरण सिंह की अदावत की। 2011 में भारतीय कुश्ती संघ का चुनाव था। आमने-सामने थे दीपेंद्र हुड्डा और बृजभूषण सिंह। इस चुनाव में बृजभूषण सिंह ने जीत हासिल की। इसके बाद अगले दो चुनाव (2015 और 2019) में भी कैसरगंज सांसद ने भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष का इलेक्शन जीता। बृजभूषण सिंह यूपी की कैसरगंज सीट से बीजेपी के लोकसभा सांसद हैं।

उनके प्रतिनिधि संजीव सिंह ने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा है, ‘धरने पर सिर्फ हरियाणा के चंद पहलवान ही बैठे हैं, क्योंकि ये पहलवान एक ही घराने और अखाड़े के हैं, जिनका संबंध कांग्रेस के सांसद दीपेंद्र हुड़्डा से है। दीपेंद्र हुड्डा हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के लड़के हैं, जो बृजभूषण सिंह से कुश्ती संघ का चुनाव हार गए थे। हरियाणा में विधानसभा का चुनाव होने वाला है।

मार्च में कुश्ती संघ का चुनाव होगा, इसलिए कांग्रेस पार्टी और उसके सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने बीजेपी को घेरने और दुष्प्रचार करने के लिए सांसद जी को निशाना बनाया है। अपने मंसूबे को सफल बनाने के लिए हरियाणा के कुछ पहलवानों को मोहरा बनाया है जो लगातार झूठ पर झूठ बोलकर देश की मीडिया और जनता को कांग्रेस के इशारे पर गुमराह कर रहे हैं।’

भारतीय कुश्ती संघ की वेबसाइट के मुताबिक पदाधिकारियों और अध्यक्ष के चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल में 26 राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों के कुल 51 सदस्य हैं। किसी भी स्टेट असोसिएशन के अध्यक्ष और जनरल सेक्रेटरी इसमें शामिल होते हैं। रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के संविधान के अनुसार हर राज्य के रेसलिंग असोसिएशन जनरल काउंसिल के लिए दो सदस्य भेजते हैं। हर प्रतिनिधि के पास एक वोट होता है। यूनियन टेरिटरी में सिर्फ दिल्ली से दो सदस्य हैं।

फरवरी 2019 में बृजभूषण शरण सिंह ने तीसरी बार कुश्ती संघ के अध्यक्ष का चुनाव जीता था। उन्हें निर्विरोध निर्वाचित किया गया था। फेडरेशन की कार्यसमिति में अध्यक्ष के अलावा एक वरिष्ठ उपाध्यक्ष, चार उपाध्यक्ष, एक मानद जनरल सेक्रेटरी, एक कोषाध्यक्ष और दो मानद ज्वाइंट सेक्रेटरी होते हैं। अध्यक्ष, जनरल सेक्रेटरी और कोषाध्यक्ष के पद पर रहने वाले भारतीय ओलिंपिक संघ के अलावा किसी भी दूसरे खेल महासंघ में पद नहीं ले सकते हैं।

साथ ही अध्यक्ष से लेकर सदस्य की उम्र 70 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। कुश्ती संघ के नियमों के मुताबिक कोई भी व्यक्ति लगातार तीन कार्यकाल या 12 साल से ज्यादा अध्यक्ष की कुर्सी पर नहीं रह सकता है। इस लिहाज से बृजभूषण शरण सिंह का तीसरा कार्यकाल पूरा हो रहा है और वो अब अध्यक्ष का चुनाव नहीं लड़ सकते हैं।

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