क्या कर्नाटक की तरह तेलंगाना में हिट होगा कांग्रेस का सियासी फॉर्मूला?

नई दिल्ली। देश में इन दिनों पांच राज्यों में विधान सभा चुनाव हो रहे हैं। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान में वोटिंग हो चुकी है और उनका परिणाम तीन दिसंबर को आने वाला है जबकि तेलंगाना विधानसभा की 119 सीटों पर गुरुवार को वोट डाले जा रहे हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, राज्य में कुल 3.26 करोड़ रजिस्टर्ड वोटर हैं और 35,655 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। असेंबली की 106 सीटों पर सुबह 7 से शाम 5 बजे तक और 13 नक्सल प्रभावित सीटों पर सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक वोटिंग होगी।

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सत्तारूढ़ BRS समेत BJP, कांग्रेस, CPI, AIMIM के कुल 2,290 उम्मीदवार मैदान में हैं। साल 2018 में बीआरएस को सबसे ज्यादा 88 सीटें मिली थीं। इस बार प्रमुख उम्मीदवारों में CM के.चंद्रशेखर राव, उनके मंत्री-बेटे के. टी. रामाराव, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी और बीजेपी के लोकसभा सदस्य बी. संजय कुमार और डी अरविंद हैं। वोटिंग के बाद एग्जिट पोल भी आएंगे।

कांग्रेस मध्य प्रदेश में अपनी सरकार बनने की उम्मीद लगा रही है जबकि उसको पूरा भरोसा है कि छत्तीसगढ़ और राजस्थान में उसकी सरकार दोबारा बनेगी। ऐसे में तेलंगाना विधानसभा चुनाव का प्रचार मंगलवार को थम गया और वहां पर गुरुवार को वोटिंग होगी।

तेलंगाना में कांग्रेस जीत का दम भ रही है और उसे 119 सीटों पर अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है।कांग्रेस और बीआरएस के बीच सीधी लड़ाई है तो बीजेपी भी लड़ाई में बनी हुई है। त्रिकोणीय मुकाबले में कांग्र्रेस को जीत की अब भी पूरी उम्मीद है। दरअसल उसने छह महीने पहले जिस सियासी फॉर्मूले को यहां पर अपनाने की कोशिश की है।

उसने किस तरह से कर्नाटक में बीजेपी को पराजित किया था उसी तरह से यहां पर तेलंगाना में बीआरएस को मात देने के लिए खास रणनीति बनाई है। तेलंगाना में कांग्रेस ने उन लोगों को भेजा है जो कर्नाटक में जीत दिलाने में अहम रोल अदा कर चुके हैं।

उनमें कर्नाटक में जीत के नायक सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार सहित 75 फीसदी कर्नाटक के मंत्रियों-नेताओं ने तेलंगाना में खास जिम्मेदारी सौंपी गई है। कांग्रेस ने अब वहीं रणनीति अपनायी जो उसने कर्नाटक चुनाव में अपनाकर जीत हासिल की थी।

कांग्रेस का पूरा फोकस कम से कम 75 सीट जीतना ताकि आसानी से सरकार बनायी जा सके। इसको लेकर वहां पर कांग्रेस पूरा कुनबा जुटा है और लगातार रणनीति बना रहा है। कांग्रेस को भरोसा है कि वहां पर वो सरकार बनाने में कामयाब होगा वहीं बीजेपी भी कांग्रेेस को रोकने के लिए पूरा जोर लगा रही है।

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