पटना। बिहार की राजनीति में तेजस्वी यादव और चिराग पासवान जल्द ही साथ दिख सकते हैं। इसके संकेत आज दोनों की मुलाकात से मिल गए हैं। भले ही यह मुलाकात व्यक्तिगत हो, लेकिन तेजस्वी यादव के बयान ने भविष्य के गर्त में छुपी राजनीतिक दोस्ती की धूल को साफ कर दिया है।
दरअसल, लोक जनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान बुधवार को अपने पिता दिवंगत नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान की पहली पुण्यतिथि कार्यक्रम के लिए आरजेडी नेता तेजस्वी यादव को न्योता देने पहुंचे थे।
तेजस्वी ने दिखाई जल्दबाजी, चिराग बोले ठीक समय नहीं
मुलाकात के बाद बाहर निकले दोनों नेताओं ने मीडिया से बात की। इस दौरान तेजस्वी यादव अपनी राजनीतिक दोस्ती को मीडिया के सामने लाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन चिराग यह बोल कर वहां से चले गए कि इस मुलाकात के राजनीतिक मायने न निकाले जाएं, यह व्यक्तिगत मुलाकात है।
अभी राजनीतिक बात करने का सही समय नहीं है। इसके बाद तेजस्वी यादव ने बयान दिया कि हम जो कहना चाहते थे हमने कह दिया। लालू जी ने जो कहा है उसके आगे हम कुछ नहीं कह सकते। दरअसल, लालू प्रसाद यादव ने कुछ दिन पहले ही तेजस्वी व चिराग पासवान के साथ आने पर बयान दिया था।
दो धड़ों में बंट गई पार्टी
राम विलास पासवान की मृत्यु के बाद लोक जनशक्ति पार्टी दो धड़ों में बंट चुकी है। जून में लोजपा के सारे सांसद चिराग पासवान को छोड़कर सांसद पशुपति पारस के खेमे में चले गए थे। उन्हें ही लोजपा प्रमुख व लोकसभा में सदन का नेता भी चुना गया है। चिराग इस लड़ाई को कोर्ट और चुनाव आयोग तक लेकर चले गए हैं।
पार्टी में रार के बाद तेजस्वी से बढ़ी नजदीकी
पार्टी में रार के बाद चिराग पासवान की तेजस्वी यादव से नजदीकी बढ़ी है। दोनों एक दूसरे के पक्ष में बयान भी दे चुके हैं। इस बीच तेजस्वी, चिराग को साथ आने का ऑफर भी दे चुके हैं। बता दें कि 2010 में राम विलास पासवान को भी लालू प्रसाद यादव ने राज्यसभा भेजने में मदद की थी।
आठ अक्तूबर को हुआ था निधन
राम विलास पासवान का निधन पिछले साल आठ अक्तूबर को हो गया था। वे काफी बीमार थे और अस्पताल में भर्ती थे। चिराग पासवान 12 सितंबर को उनकी पहली पुण्यतिथि मनाने जा रहे हैं। कार्यक्रम का न्योता देने के लिए वे गुरुवार को दिल्ली में लालू प्रसाद यादव से मुलाकात करेंगे तो जल्द ही वे सीएम नीतीश कुमार से भी मिल सकते हैं।