गोरखपुर: कोरोना के 5 मामलों की हिस्ट्री ने डॉक्टरों को चौंकाया

गोरखपुर। गोरखपुर में कोरोना पॉजिटिव मरीजों के पांच मामलों की हिस्ट्री से विशेषज्ञ चकरा गए हैं। एक मामले में दुधमुहे पॉजिटिव बच्‍चे को दूध पिलाने वाली मां की रिपोर्ट लगातार निगेटिव आ रही है तो बीमार पिता की देखरेख में जुटी बेटी भी पॉजिटिव है, लेकिन पिता लगातार निगेटिव हैं। तीन साल का बेटा भी निगेटिव ही है। कुछ ऐसे मामले भी हैं जिनमें पॉजिटिव के साथ हफ्तों से लगातार रहने वाले लोगों को संक्रमण ने अब नहीं छुआ है। इतना ही नहीं, कोरोना से संक्रमित दो युवा तो सिर्फ 03 दिन में ही ठीक हो गए। एक मामले में 06 दिन में वायरस बेअसर हो गया। ऐसे मामलों ने विशेषज्ञों को चकरा दिया है, जबकि लक्षण की समय सीमा 14 दिन की मानी जा रही है।
चौंकाने वाले हैं मामले
आईसीएमआर के सहयोगी केन्द्र के तौर पर गोरखपुर में काम कर रहे रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर के लिए यह पांचों केस चौंकाने वाले हैं। सेंटर के निदेशक डॉ.रजनीकांत के मुताबिक हम वायरस को समझने की कोशिश कर रहे हैं। इन पांचों मामलों को अलग-अलग केस के तौर पर रिकॉर्ड किया गया है। इस पर महामारी के नियंत्रण के बाद रिसर्च होगी। मुख्य रूप से वायरल लोड, इम्यूनिटी और प्रिवेंशन के बिंदुओं पर रिसर्च को फोकस करेंगे।
सटीक थ्योरी नहीं
डॉ. रजनीकांत के मुताबिक कोरोना में अब तक कोई सटीक थ्योरी नहीं मिली है। पहली थ्योरी, दूसरी से खारिज होने वाली है। ऐसा माना जा रहा है मरीज के अंदर मौजूद वायरल लोड का संक्रमण से संबंध है। पॉजिटिव मिले सभी मरीजों के वायरल लोड पर रिसर्च होगा। छठें दिन से ही लगातार निगेटिव महाराजगंज निवासी एक युवक 30 अप्रैल को जांच में कोरोना पॉजिटिव निकला। वह किडनी का मरीज भी है। उसी दिन उसे बीआरडी मेडिकल कालेज में भर्ती करा दिया गया। छठे दिन उसकी कोरोना जांच की गई। जांच में निगेटिव निकला। 07 मई को हुई दोबारा जांच में भी रिपोर्ट निगेटिव रही। हालांकि एहतियातन वह अभी भी बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती है। अब उसका किडनी का इलाज हो रहा है।
कुशीनगर की मरीज के साथ ऐसा हो रहा
कुशीनगर की युवती पहले दिन पॉजिटिव आई। फिर तीसरे दिन निगेटिव हो गयी। युवती 05 मई को पॉजिटिव निकली। यहीं का एक युवक 06 मई यानी अगले दिन पॉजिटिव पाया गया। दोनों को बीआरडी में भर्ती कराया गया। 08 मई को फिर उनकी जांच की गई। दोनों निगेटिव हो गए। केवल तीन दिन में निगेटिव आने से चिकित्सक हैरान हैं। अभी दोनों की कई बार जांच होगी। यह मामला वायरस के विचित्र व्यवहार को दर्शाने वाला माना जा रहा है।
बेटी पॉजिटिव, बीमार पिता बचे हैं
लीवर की बीमारी से जूझ रहे गोरखपुर के रानीभैंसा निवासी अधेड़ की तीमारदारी करने वाली बड़ी बेटी कोरोना पॉजिटिव निकली है। अधेड़ दिल्ली में मजदूरी करता था। बेटी ही पिता को अस्पताल ले जाती और ले आती थी। बीमार पिता की चार बार जांच हुई। वह हर बार निगेटिव निकले। संक्रमित महिला के साथ रहने वाला उसका तीन साल का बेटा भी निगेटिव है जबकि वह हमेशा अपनी मां के साथ ही सोता था।
पॉजिटिव बच्चा दूध पीता रहा, मां फिर भी निगेटिव
बस्ती के तीन माह का मासूम कोरोना पॉजिटिव लगातार मां के साथ रहा। मां ही उसे दूध पिलाती रही। मासूम को इलाज के लिए 14 दिन बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया। इस दौरान भी मां साथ में रही। समय-सयम पर उसने स्तनपान कराया। फिर भी कोरोना वायरस मां से दूर रहा। मां की चार बार जांच हुई है और हर बार वह निगेटिव निकली है। अंततः बच्चा स्वस्थ्य हो गया और उसे डिस्चार्ज कर दिया गया।
दिल्ली से गोरखपुर तक साथ, फिर भी बचे रहे
गोरखपुर के हाटा बुजुर्ग के कोरोना संक्रमित के साथ असिलाभार व सई बुजुर्ग गांवों के दो लोग दिल्ली में तीन माह से एक कमरे में रह रहे थे। दोनों ने 19 अप्रैल को किडनी की बीमारी के इलाज के लिए तीसरे साथी को अस्पताल में भर्ती कराया। उसकी तीमारदारी में लगे रहे। उसके साथ एंबुलेंस से 26 अप्रैल को गोरखपुर आए। यहां बीमार साथी पॉजिटिव आया। संदेह में 04 बार उसके दोनों साथियों की जांच हो चुकी है। अब तक दोनों निगेटिव हैं।
रोग प्रतिरोधी क्षमता पर अटका संशय
डॉ रजनीकांत का कहना है कि संक्रमित होने में इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) का अहम रोल होता है। इससे वायरस की मारक क्षमता प्रभावित होती है। सभी की इम्यूनिटी अलग-अलग होती है। संक्रमित संग रहने वालों के इम्यून सिस्टम पर शोध होगा। जो सिर्फ तीन दिन में ठीक हो गए, उनकी इम्यूनिटी की जांच होगी।
यह भी है रिसर्च का विषय
डॉ रजनीकांत के मुताबिक कोरोना संक्रमित के साथ रहने वाले लोगों के व्यवहार पर भी बीमारी का गहरा प्रभाव होता है। उन्होंने बचाव के क्या उपाय किए? उपाय कितना कारगर है? इससे संक्रमण से कितना बचा जा सकता है? यह भी एक रिसर्च का बिन्दु है।
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