मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में संजय राउत की जमानत पर हुई रिहाई चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के फायरब्रांड नेता आर्थर रोड जेल में तीन महीने का समय बिताने के बाद शांत हो गए हैं? पतरावाला चॉल से संबंधित मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच का सामना कर रहे राउत ने जेल से बाहर आने के बाद पिछले कुछ दिनों में अपनी आक्रामकता दिखाई, लेकिन उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की कड़ी आलोचना से परहेज किया।
उन्होंने उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की तारीफ कर सबको चौंका दिया। उन्होंने कहा कि फडणवीस आवास विभाग में कुछ अच्छा काम कर रहे हैं और जेल के अंदर की स्थिति से उन्हें अवगत कराने के लिए वह जल्द ही उनसे मिलेंगे। इसके अलावा उन्होंने कहा कि वह इन मुद्दों को उठाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मिलेंगे।
आपको बता दें कि संजय राउत ने अभी दैनिक मीडिया ब्रीफिंग की शुरुआत नहीं की है, जिसमें वह करीब-करीब हर सुबह केंद्र और बीजेपी के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया करते थे। ऐसे में लोग सवाल पूछने लगे हैं कि क्या संजय राउत जेल जाने के बाद नरम पर गए हैं?
अटकलें लगाई जा रही हैं कि शिवसेना नेता फडणवीस को लेकर धीमी गति से चलना चाहते हैं और इसके एकनाथ शिंदे के खिलाफ अपना रुख सख्त करना चाहते हैं। उद्धव ठाकरे के एक करीबी यहयोगी ने कहा, “भाजपा एक जगजाहिर प्रतिद्वंद्वी है। हम जानते हैं कि वे हमें घेरने की कोशिश कर रहे थे। शिंदे हमारे अपनों में से एक था जिसने हमें पीठ में छुरा घोंपा। ऐसे में हमारी प्राथमिकता उन्हें खत्म करना होगा।”
मीडिया से बात करते हुए संजय राउत ने इस बात पर भी जोर दिया कि वास्तव में फडणवीस ही राज्य में सरकार चलाते हैं। आपको बता दें कि एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के समीकरण के भी ठीक नहीं होने के दावे किए जा रहे हैं।
क्या महाराष्ट्र में राजनीतिक लड़ाई बदलने वाली है? यह पता लगाने के लिए हमें कुछ और दिनों तक इंतजार करना होगा। खासकर अगले साल की शुरुआत में होने वाली बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनाव पर नजर बनाए रखना होगा।
फडणवीस-शिंदे में तकरार
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ठाणे में एक विशेष आईपीएस अधिकारी को पुलिस आयुक्त के रूप में नियुक्त करने को लेकर इच्छुक नहीं हैं। हालांकि, उपमुख्यमंत्री और प्रदेश के गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस उस अधिकारी को यह पद देना चाहते हैं। आपको बता दें कि यह द्वंद सिर्फ इसी आईपीएस अधिकारी की नियुक्ति तक ही सीमित नहीं है।
शिंदे बीएमसी कमिश्नर इकबाल सिंह चहल को भी पसंद नहीं करते हैं, लेकिन फडणवीस आईएएस अधिकारी को तुरंत शिफ्ट करने के मूड में नहीं हैं। हालांकि, गठबंधन सरकारों के कार्यकाल के दौरान महाराष्ट्र में इस तरह की असहमति कोई नई बात नहीं है। सत्ताधारी सहयोगियों के बीच अक्सर महत्वपूर्ण नियुक्तियों को लेकर मतभेद होते रहे हैं।
कांग्रेस को मिली राहत
महाराष्ट्र में कांग्रेस के लिए राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का एक सकारात्मक परिणाम यह है कि पार्टी के कुछ नेता जिन पर भाजपा के साथ जाने का संदेह था, अभी भी पार्टी के साथ बने हुए हैं। ऐसी अफवाहें थीं कि विश्वजीत कदम, अमित देशमुख और उनके भाई धीरज देशमुख जैसे कांग्रेस नेता भाजपा की ओर झुक रहे थे। तीनों विधायक हैं। उनमें से दो महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार में मंत्री थे।
अमित और धीरज पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के बेटे हैं। विश्वजीत के पिता पूर्व उद्योग मंत्री पतंगराव कदम थे। पिछले दो-तीन दिनों में इन विधायकों को भारत जोड़ो यात्रा में देखा गया और कांग्रेस खेमे के कई लोगों ने राहत की सांस ली है।
खड़गे ने नांदेड़ो में भीड़ को किया हैरान
गुरुवार को भारत जोड़ो यात्रा के तहत नांदेड़ में एक रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मराठी में बोलकर भीड़ को चौंका दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर शुद्ध मराठी में हमला किया तो भीड़ खुश हो गई।
खड़गे का जन्म कर्नाटक के बीदर जिले में हुआ था और वे गुलबर्गा में पले-बढ़े। ये इलाके महाराष्ट्र के करीब हैं और वहां कई लोग कन्नड़ के साथ-साथ मराठी भी बोलते हैं। खड़गे शायद दूसरे कांग्रेस अध्यक्ष हैं जो मराठी बोल सकते हैं। उनसे पहले पीवी नरसिम्हा राव भी मराठी अच्छी बोल सकते थे। राव ने नागपुर जिले में रामटेक लोकसभा क्षेत्र का भी प्रतिनिधित्व किया था।