नयी दिल्ली। दागी सांसदों और विधायकों के बुरे दिन आ सकते है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के रिटायर होने वाले सीजेआई दीपक मिश्रा अपने रिटायरमेंट से पहले ताबड़तोड़ 8 फैसले लेने वाले है। क्या आपराधिक मामलों में सांसदों और विधायकों के खिलाफ आरोप तय होते ही उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को इस मामले में फैसला सुना सकता है। सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की एक संवैधानिक पीठ मंगलवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करेगी।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि जिन लोगों के खिलाफ आरोप तय हो गए हों और पांच साल या उससे ज्यादा सजा का प्रावधान हो तो उन्हें चुनाव लड़ने से रोका जाए। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस याचिका का विरोध किया है। जिसमें आपराधिक पृष्ठभूमि वाले जन प्रतिनिधियों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की मांग की गई है। मौजूदा नियम के मुताबिक, सांसदों और विधायकों के चुनाव लड़ने पर केवल तभी रोक लगाई जाती है, जब वह आपराधिक मामलों में दोषी पाए जाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 28 अगस्त को मामले में सुनवाई करते वक्त कहा था कि मतदाताओं को उम्मीदवारों के पिछले जीवन के बारे में जानने का हक है। चुनाव आयोग ऐसे में राजनीतिक पार्टियों से सीधे कह सकता है कि वह आपराधिक मामलों में शामिल लोगों को उनके चुनाव चिह्न पर लड़ने के लिए टिकट ना दें। 5 जजों की संवैधानिक पीठ ने इस मामले में पोल पैनल, केंद्र सरकार और पार्टियों की राय जानने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया है। कोर्ट अब मंगलवार को इस याचिका पर फैसला सुना सकता है। इसके अलावा कोर्ट एक अन्य याचिका पर भी सुनवाई करेगा। जिसमें ऐसे सांसदों और विधायकों को लॉ प्रैक्टिस करने से भी रोकने की मांग की गई है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा सीजेआई दीपक मिश्रा 2 अक्टूबर को रिटायर होने वाले है।