नई दिल्ली। विधानसभा चुनाव जीतने के लिए इस बार कांग्रेस दो बार हारे उम्मीदवारों पर भी दांव लगाएगी। पिछली बार ऐसे दावेदारों के टिकट काट दिए गए थे। जिन सीटों पर बीजेपी लगातार चुनाव जीत रही है, वहां एंटी-इनकम्बेंसी का फायदा उठाने के लिए भी पार्टी सबसे पहले टिकट डिक्लेयर करेगी। सितंबर अंत तक 80-90 सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर देगी। पहली लिस्ट में नए जिलों से दावेदारी जताने वालों का खास ध्यान रखा जाएगा।
हारे हुए उम्मीदवारों पर भी दांव क्यों?
राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि 2018 के चुनाव में 13 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी। इसमें से महुआ विधायक ओम प्रकाश हुड़ला को छोड़ ज्यादातर कांग्रेस बैकग्राउंड से ही थे। लगातार हार के चलते इनका टिकट कट गया था। मगर वे निर्दलीय या किसी अन्य पार्टी से लड़े और चुनाव जीत गए। यही वजह है कि पार्टी ‘दो बार लगातार हारने वालों को टिकट नहीं’ जैसा कोई भी क्राइटेरिया नहीं रखना चाहती। इन उदाहरणों से समझते हैं…।
संयम लोढ़ा : सिरोही सीट से संयम लोढ़ा भी 2008 और 2013 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे। मगर दोनों बार हार गए। 2018 में टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय लड़े और चुनाव जीते।
आलोक बेनीवाल : शाहपुरा सीट से 2008 और 2013 में कांग्रेस से चुनाव लड़े थे मगर हार गए थे। जिसके चलते उनका 2018 में टिकट कट गया था, लेकिन 2018 में निर्दलीय लड़े और जीते।
खुशवीर सिंह : मारवाड़ जंक्शन सीट से 2008 और 2013 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे। मगर दोनों बार हार गए। ऐसे में 2018 में उनका टिकट कटा। मगर 2018 में निर्दलीय चुनाव लड़े और जीत गए।
दीपचंद खैरिया : किशनगढ़बास सीट से 2008 और 2013 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे, दोनों बार हार मिली। 2018 में कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया तो बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़े और जीते।
राजकुमार गौड़ : श्रीगंगानगर सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में 2018 का चुनाव जीता। इससे पहले वे 2008 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते थे।
महादेव सिंह : खंडेला सीट से महादेव सिंह 2018 में निर्दलीय चुनाव जीते थे। इससे पहले 2008 में वे इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे मगर हार गए थे।
बाबूलाल नागर : दूदू सीट से बाबूलाल नागर ने निर्दलीय चुनाव जीता। इससे पहले 2013 में उनके भाई हजारीलाल नागर काे कांग्रेस से टिकट मिला था। मगर वे हार गए थे। 2008 में बाबूलाल नागर खुद चुनाव जीते थे और मंत्री भी रहे थे।
लक्ष्मण मीणा : बस्सी सीट से लक्ष्मण मीणा को 2013 में कांग्रेस से टिकट मिला था, मगर वे चुनाव हार गए और तीसरे नंबर पर रहे थे। 2018 में उन्हें कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया मगर वे निर्दलीय जीत गए।
रामकेश मीणा : गंगापुर सीट से साल 2008 में बीएसपी और 2013 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते थे। मगर 2018 में टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय लड़े और जीत गए।
रमीला खड़िया : कुशलगढ़ सीट से रमीला खड़िया ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और विधायक बनीं। इससे पहले 2013 में इनके पति हुर्तिंग खड़िया को कांग्रेस से टिकट मिला था। मगर वे चुनाव हार गए।
राजेंद्र सिंह गुढ़ा : उदयपुरवाटी सीट से बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़े। बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए। इससे पहले 2013 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे मगर हार गए थे। इससे पहले 2008 में बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़े और जीते।
अब जानते हैं कि कांग्रेस की पहली सूची कब आएगी और उसके लिए पार्टी ने क्या मापदंड तय किए हैं?
पार्टी सूत्रों की मानें तो कांग्रेस की पहली लिस्ट सितंबर के अंत में आने की संभावना है। पार्टी का फोकस हर हाल में आचार संहिता लगने से पहले लिस्ट जारी करने पर है। पहली लिस्ट में 80 से 90 सीटों पर टिकट डिक्लेयर कर दिए जाएंगे।
किस तरह पहली लिस्ट की सीटें तय होंगी?
पहला : बीजेपी विधायकों की एंटी इनकम्बेंसी का फायदा उठाने का प्लान
ऐसी कई सीटें हैं, जहां बीजेपी पिछले 3 बार से चुनाव जीत रही है। कांग्रेस का मानना है कि इन सीटों पर लगातार बीजेपी की जीत से पार्टी को लेकर एंटी इनकम्बेंसी है। खासतौर से 2008 और 2018 में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद इन सीटों पर बीजेपी प्रत्याशी जीते हैं। ऐसे में यहां पर कांग्रेस को इस बार बढ़त मिल सकती है।
राजस्थान में ऐसी 28 सीटें हैं, जहां पर भाजपा पिछले तीनों चुनाव जीत रही है। इनमें राजसमंद, आसींद, भीलवाड़ा, बूंदी, कोटा साउथ, लाडपुरा, रामगंजमंडी, झालरापाटन, खानपुर, बीकानेर ईस्ट, रतनगढ़, फुलेरा, विद्याधरनगर, मालवीयनगर, सांगानेर, अलवर शहर, अजमेर नोर्थ, अजमेर साउथ, ब्यावर, नागौर, सोजत, पाली, बाली, सूरसागर, सिवाना, भीनमाल, रेवदर और उदयपुर शहर सीट शामिल हैं। इन सीटों पर कांग्रेस जल्दी ही टिकट देने की तैयारी में है। इसके अलावा कुछ सीटें वो भी हैं, जहां निर्दलीय या अन्य पार्टियों के प्रत्याशी चुनाव जीत रहे मगर कांग्रेस वहां नहीं जीत रही।
दूसरा : ग्रीन सीटें, जहां मजबूत चेहरे और कांग्रेस भी मजबूत
इसके अलावा कांग्रेस का फोकस पहली लिस्ट में उन सीटों पर है, जो कांग्रेस की ग्रीन सीट्स हैं। इनमें वो सीटें हैं, जहां पार्टी और चेहरे दोनों ही मजबूत स्थिति में हैं। इनमें सीएम, मंत्री सहित वो चेहरे हैं, जिनकी पकड़ मजबूत है।
इनमें सरदारपुरा से सीएम अशोक गहलोत, टोंक से सचिन पायलट, नाथद्वारा से सीपी जोशी, लक्ष्मणगढ़ से गोविंद सिंह डोटासरा, केकड़ी से रघु शर्मा, बायतू से हरीश चौधरी, लालसोट से परसादीलाल मीणा, बागीदौरा से महेंद्रजीत मालवीय, मांडल से रामलाल जाट, खाजुवाला से गोविंद राम मेघवाल, कोलायत से भंवर सिंह भाटी, हिंडौली से अशोक चांदना, कोटपुतली से राजेंद्र यादव, दौसा से मुरारी लाल मीणा, ओसियां से दिव्या मदेरणा, खेरवाड़ा से दयाराम परमार, आदर्श नगर से रफीक खान, सलूम्बर से रघुवीर मीणा, भीम से सुदर्शन सिंह रावत जैसे नाम शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि पहली लिस्ट में यह नाम हो सकते हैं।
तीसरा : जहां पार्टी के पास विकल्प नहीं
इसके अलावा पहली लिस्ट में उन सीटों पर भी फोकस है, जहां पार्टी के पास प्रत्याशी के रूप में ज्यादा विकल्प नहीं है। यानी वहां पार्टी की सेकेंड लाइन खड़ी नहीं हो पाई है। ये वो सीटें हैं, जहां कांग्रेस खुद को मजबूत भी मान रही है और कमजोर भी। वहां पर उस सीट के चर्चित चेहरे के साथ पार्टी जा सकती है।
इनमें गुड़ामालानी, कोटा उत्तर, अंता, पोकरण, निम्बाहेड़ा, डीग-कुम्हेर, झुंझुनू, सपोटरा, सिविल लाइंस, सिकराय, वैर, अलवर ग्रामीण, बानसूर, नावां, बयाना, सवाईमाधोपुर, किशनगढ़बास, सादुलपुर, बांदीकुई, बामनवास, विराटनगर, नदबई, निवाई, परबतसर, राजाखेड़ा, दूदू, सरदारशहर, खेतड़ी, सिरोही, वल्लभनगर, गंगापुर और बालोतरा जैसी सीटें शामिल हो सकती हैं।
दिल्ली महिला कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष और राजस्थान की सह-प्रभारी अमृता धवन बताती हैं कि पार्टी इस चुनाव में विनिबिलिटी फैक्टर (जीतने की सबसे ज्यादा संभावना) को सबसे आगे रखेगी। जो कैंडिडेट जीतने वाला होगा, उसे सबसे ज्यादा तरजीह दी जाएगी। पार्टी उन सीटों पर फोकस कर रही है, जहां हमारे जीतने वाले चेहरे हैं या जहां सेकेंड लाइन विकसित नहीं हुई है। हमारी ग्रीन सीट्स हैं, उन पर हमारा फोकस है।
उम्र मसला नहीं, परिवार में से जीतने वाले को मिलेगा टिकट
राजनीतिक जानकार और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि इस चुनाव में पार्टी बहुत ज्यादा मापदंडों पर गौर नहीं करेगी। इसमें उम्र भी कोई मसला नहीं है। खुद सीएम अशोक गहलोत भी पिछले दिनों यह बयान दे चुके हैं कि उम्र का कोई मसला नहीं है। ऐसे में देखने वाली बात ये होगी कि परिवार में पार्टी किसे टिकट देगी। कई नेता हैं, जो अपने पुत्र और परिवार के अन्य सदस्यों के लिए टिकट मांग रहे हैं। ऐसे में यह जरूरी नहीं कि उसी अनुसार टिकट दिए जाएं। पार्टी को जो जिताऊ उम्मीदवार लगेगा उसे ही टिकट दिया जाएगा।
जहां नए जिले, वो नाम पहले, जिले बनने का प्रचार करेंगे
सरकार ने इस बार 19 नए जिले बनाए हैं। इनमें जयपुर और जोधपुर के अलावा 15 अलग जिले हैं। ऐसे में इन जिलों से जुड़ी विधानसभाओं और उनसे संबंध रखने वाले प्रत्याशियों के टिकट भी पहली लिस्ट में हो सकते हैं। इन सीटों पर प्रत्याशी जल्दी घोषित कर पार्टी प्रचार का समय देगी, ताकि नए जिलों के गठन का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाया जा सके।