नई दिल्ली । पिछली बार पाकिस्तानी पीएम इमरान खान की ताजपोशी प्रोग्राम में शामिल होने पाकिस्तान जाने के बाद पाकिस्तानी सेना प्रमुख बाजवा को गले लगाने के बाद भाजपा के निशाने पर चल रहे नवजोत सिद्वू पाकिस्तान को लेकर अपने रवैये पर अटल है। उल्लेखनीय है कि भारत में रहने वाले करोड़ों सिखों के सपने को सच करने के लिए दोनों मुल्क गुरुद्वारा करतारपुर साहिब जाने गलियारा बनाने को राजी हो गए हैं। भारत सरकार अपने हिस्से वाले गलियारे की नींव सोमवार को रखी जबकि पाकिस्तान 28 नवंबर को अपने हिस्से वाले कॉरिडोर का शिलान्यास करेगा। उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने आज पंजाब के गुरदासपुर जिले के मान गांव में इस कॉरिडोर की आधारशिला रखी। यह सड़क गुरदासपुर के मान गांव से पाकिस्तान से लगने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा तक जाएगी। इस मौके पर केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह साथ मौजूद रहे।
पंजाब सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा 28 नवंबर को गुरुनानक जी के वास्ते मैं काटों के रास्ते पर चलकर पाकिस्तान जा सकता हूं। पाकिस्तान ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिहं सिद्धू को न्योता भेजा है। लेकिन सुषमा स्वराज ने अपनी सेहत और चुनावी व्यस्तताओं का हवाला देते हुए पाकिस्तान जाने से इनकार कर दिया। सुषमा स्वराज ने बताया भारत सरकार की ओर से दो केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल और एचएस पुरी पाकिस्तान जाएंगे। वहीं दूसरी ओर कैप्टन ने शहीदों का मुद्दा उठाते हुए पाकिस्तान जाने से इनकार कर दिया है।
नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि 28 नबम्बर को गुरू नानक जी के वास्ते मैं कांटों के रास्तों पर चलकर पाकिस्तान जा सकता हूं। मैं तो सिख हूं और हम तो झप्पी के लिए जाने जाते हैं, जनरल बाजवा से झप्पी काम कर गई। मैं तो उसकी झप्पी करूंगा जो मेरे नानक के वास्ते हैं। मैं तो सिर्फ इस काम के लिए छोटा सा जरिया हूं। ये 12 करोड़ लोगों की दुआओं का असर है। उन्होंने कहा कि कोरिडोर अमन का रास्ता साबित होगा। भारत सरकार ने कारिडोर बनाने में देरी की, पाकिस्तान दो कदम चला।
पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित करतारपुर साहिब गुरुद्वारा सिख समुदाय का पवित्र धार्मिक स्थल है। सिखों के प्रथम गुरू गुरूनानक देव ने जीवन के आखिरी 18 साल यहां गुजारे। करतारपुर में ही नानकदेव जी का शरीर पूरा हुआ था। यहीं पर सबसे पहले लंगर की शुरूआत हुई थी। नानकदेव जी ने ‘नाम जपो, कीरत करो और वंड छको’ का सबक दिया था। करतारपुर साहिब गुरुद्वारा गुरुदासपुर में भारतीय सीमा के डेरा साहिब से महज चार किलोमीटर की दूरी पर है। करतापुर कॉरिडोर बनने से सिखों का 70 साल लंबा इंतजार खत्म होगा। भारत के करोड़ों सिख गुरु नानक की समाधि के दर्शन कर पाएंगे। सिख श्रद्धालुओं को बिना वीजा के पाकिस्तान में एंट्री मिलेगी, सिर्फ टिकट लेना होगा। कॉरिडोर खुलने से भारत-पाकिस्तान के बीच भरोसा बढ़ेगा।