नई दिल्ली। रोजगार के मुद्दे पर केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार लगातार विपक्षी पार्टियों के निशाने पर रही है। रविवार को केन्द्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने यह कहकर सनसनी फैला दी थी कि जब नौकरियां ही नहीं हैं तो आरक्षण देकर क्या मिलेगा। गड़करी के इस बयान को लपकने में विपक्षी पार्टियों ने देर नहीं की। विपक्ष की तरफ से राहुल गांधी नितिन गड़करी पर हमलावर हो गये है। राहुल ने एक समाचार रिपोर्ट के साथ सोमवार को ट्वीट किया। रिपोर्ट में केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं जहाजरानी मंत्री ने कहा था कि जब नौकरियां ही नहीं हैं तो आरक्षण कैसे दें? राहुल ने ट्वीट कर कहा बहुत बढिय़ा सवाल (नितिन) गडकरी जी। हर भारतीय भी यही सवाल पूछ रहा है। नौकरियां कहां हैं।’’ राहुल ने यह टिप्पणी गडकरी के उस बयान के बाद की है जिसमें उन्होंने रविवार को महाराष्ट्र में पत्रकारों से कहा था कि आरक्षण रोजगार मिलने की गारंटी नहीं हैं, क्योंकि नौकरियां घट रही हैं।
गडकरी ने सवालिया लहजे में कहा चलिए मान लेते हैं कि आरक्षण दे दिया गया, लेकिन नौकरियां नहीं हैं। क्योंकि बैंकों में, आईटी की वजह से नौकरियां घट गई हैं। सरकारी भर्ती रूकी हुई है। नौकरियां कहां हैं? उन्होंने यह भी कहा कि आरक्षण के साथ समस्या यह है पिछड़ापन राजनीतिक हित बन रहा है। गडकरी ने कहा एक सोच यह है कि गरीब गरीब होता है, उसकी कोई जाति, पंथ या भाषा नहीं होती। चाहे कोई भी धर्म हो, सभी समुदायों में एक ऐसा वर्ग है जिसके पास पहनने के लिए कपड़े नहीं है, खाने के लिए कुछ नहीं है। उन्होंने आगे कहा एक विचार यह भी है कि हमें हर समुदाय के गरीब वर्ग का ध्यान रखना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 आम चुनावों से पहले देश के युवकों से वादा किया था कि वह हर साल एक करोड़ नौकरियां पैदा करेंगे। लेकिन वह इस वादे को चार साल बाद भी पूरा करने में सफल नहीं हो पाए है। इस वजह से वह विपक्षी पार्टियों के निशाने पर हमेशा चलते रहे है। जहां एक तरफ मीडिया की रिपोर्टस के अनुसार देश में लाखों नौकरियों में वैकेंसी है वहीं नौकरियां न दिए जाने की वजह से देश के युवा परेशान हो रहे है। वही माना जा रहा है कि 2019 के चुनावों के पास आने के बाद ही केन्द्र सरकार नौकरियो की घोषणा करेगी ताकि वह चुनावों में इनके वोट पाने में सफल हो सके।