विधानसभा चुनाव के लिए पाला बदलने का खेल जारी है। कुछ नेता ऐसे हैं, जिन्हें पांच साल बाद पार्टी की नीतियां खराब लगने लगती हैं और ऐसा बताकर वे एक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में चले जाते हैं। नेताओं का एक बड़ा तबका ऐसा भी है जो सिर्फ और सिर्फ टिकट पाने के लिए पालाबदली का खेल करता है।
इस तरह के नेताओं ने एक महीने में दो-दो पार्टियां बदली। एक पार्टी से टिकट नहीं मिला तो दूसरी पार्टी में चले गए। दूसरी पार्टी में भी दाल नहीं गली तो तीसरी पार्टी में चले गए या फिर निर्दलीय उतर आए। इनका कहना है कि सिर्फ जनसेवा इरादा है। जनसेवा करने के लिए उन्होंने ये सब किया।

चौधरी गजेंद्र सिंह, अनूपशहर
बुलंदशहर जिले में जहांगीराबाद क्षेत्र के गांव डूंगरा जाट निवासी गजेंद्र सिंह बसपा सरकार में अनूपशहर विधायक रहे। इस बार चुनाव से चंद दिन 13 दिसंबर को उन्होंने बसपा छोड़ दी और दिल्ली पहुंचकर जयंत चौधरी के समक्ष राष्ट्रीय लोकदल ज्वाइन कर लिया। वह सपा-रालोद गठबंधन से टिकट की मजबूत दावेदारी कर रहे थे, लेकिन यह सीट एनसीपी के खाते में चली गई और वरिष्ठ नेता केके शर्मा को टिकट दे दिया गया।
दाल न गली तो चौधरी गजेंद्र एक महीने में ही रालोद छोड़ गए। 17 जनवरी को फिर से दिल्ली पहुंचकर दीपेंद्र हुड्डा के समक्ष कांग्रेस ज्वाइन कर ली। अब कांग्रेस ने उनको अनूपशहर सीट से प्रत्याशी घोषित किया है।

अमित जानी, सिवाल खास
प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे अमित जानी मेरठ जिले की सिवाल खास विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में थे। गठबंधन में यह सीट सपा के खाते में गई और पूर्व विधायक गुलाम मोहम्मद को प्रत्याशी बनाया गया। टिकट न मिलने से नाराज अमित जानी ने प्रसपा छोड़ दी।
10 दिन पहले उन्होंने आचार्य प्रमोद कृष्णम के समक्ष कांग्रेस ज्वाइन कर ली। कांग्रेस ने अमित जानी को टिकट नहीं दिया और सिवाल खास से जगदीश शर्मा को प्रत्याशी बना दिया। अब अमित जानी ने 20 जनवरी को मेरठ कलक्ट्रेट पहुंचकर निर्दलीय के रूप में पर्चा भरा है।

गुड्डू पंडित, डिबाई
श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित बुलंदशहर जिले की डिबाई सीट से दो बार विधायक चुने गए। पहली बार बसपा और दूसरी बार सपा से जीते। गुड्डू के भाई मुकेश शर्मा सपा सरकार में शिकारपुर सीट से विधायक थे। मुकेश ने एमएलसी चुनाव में भाजपा के लिए क्रॉस वोट कर दी। इस पर सपा ने दोनों भाइयों को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। अब गुड्डू सपा-रालोद गठबंधन समेत किसी भी प्रमुख पार्टी से टिकट पाने की जुगत में थे।
15 दिन पहले ही उन्होंने दिल्ली जाकर रामगोपाल यादव के समक्ष सपा की सदस्यता ली थी, लेकिन सपा ने डिबाई से हरीश लोधी को टिकट दे दिया। दूसरी पार्टियों ने भी अपने-अपने प्रत्याशी उतार दिए थे। सारी पार्टियों के दरवाजे बंद होने पर गुड्डू शिवसेना की शरण में पहुंच गए। शिवसेना ने 21 जनवरी को उन्हें डिबाई सीट से प्रत्याशी घोषित किया है।

इमरान मसूद, सहारनपुर
सहारनपुर जिले में बेहट के पूर्व विधायक इमरान मसूद, उनके जुड़वा भाई एवं गंगोह से मौजूदा विधायक नोमान मसूद ने 10 जनवरी को कांग्रेस छोड़ दी। वह अखिलेश यादव से मिलने लखनऊ पहुंच गए। अखिलेश यादव ने अपने घर के मीटिंग रूम से फोटो जारी कर दिया कि इमरान मसूद पार्टी में शामिल हो गए हैं। सहारनपुर जिले की विधानसभा सीटों में टिकट वितरण पर बात नहीं बनी तो इमरान मसूद नाराज होकर सहारनपुर आ गए।
यह माना जाने लगा कि इमरान मसूद सपा से नहीं जुड़ेंगे। इधर, सपा ने सहारनपुर की सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए थे इसलिए चर्चाएं होने लगी कि अब इमरान मसूद का राजनीतिक करियर क्या होगा। इमरान के बसपा में जाने की चर्चाएं तक सुनी गईं। 20 जनवरी को एकाएक नया मोड़ आया। अखिलेश यादव ने पुन: फोटो ट्वीट करके बताया कि इमरान मसूद सपा में शामिल हो गए हैं। हालांकि यहां भी इमरान को टिकट नहीं मिला है।