गुवाहाटी। चक्रवाती तूफान अम्पन का प्रभाव असम समेत पूरे पूर्वोत्तर में बुधवार रात से देखा जा रहा है। प्रथम एनडीआरएफ के सूत्रों ने मौसम विभाग के हवाले से बताया है कि असम में तूफान के चलते 27 किमी की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं। हालांकि, अभी तक जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ है।
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मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार असम और मेघालय में गुरुवार दोपहर ढाई बजे तक भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। पूर्वोत्तर में अगले छह घंटे तक तूफान का असर रहेगा। सबसे अधिक प्रभाव असम के धुबरी जिला में पड़ने का अंदेशा जताया गया है। जानकारी के अनुसार असम व मेघालय में जहां भारी बरसात हो रही है, वहीं पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी बारिश हो रही है।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले से लेकर पूर्व मेदिनीपुर के बीच पड़ने वाले हावड़ा, हुगली, कोलकाता और उत्तर 24 परगना जिले में चक्रवात “अम्पन” ने भारी तबाही मचाई है। दोपहर ढाई बजे यह चक्रवात दीघा के समुद्र तट से टकराया था। उसके बाद कम से कम 165 किलोमीटर और अधिकतम 185 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तटीय क्षेत्रों में तूफान ने तांडव मचाना शुरू किया था। दीघा के बाद दक्षिण 24 परगना, उसके बाद उत्तर 24 परगना फिर कोलकाता, हावड़ा और हुगली में रात 11:30 बजे तक तांडव मचाता रहा।
मौसम विभाग के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक गणेश कुमार दास ने गुरुवार सुबह बताया कि बुधवार रात 11:30 बजे तूफान कमजोर पड़ा और धीरे-धीरे बांग्लादेश की ओर बढ़ गया है। इधर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बताया कि सबसे अधिक प्रभाव उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिले पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि इन दोनों जिलों में पूरी तरह से सर्वनाश हो गया है। लाखों मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। सीएम ने बुधवार रात ही मीडिया से मुखातिब होकर दावा किया था कि 10 से 12 लोगों के मारे जाने की सूचना उन्हें मिली है। यह संख्या और बढ़ सकती हैं।
300 साल पहले आया था ऐसा चक्रवात-
मुख्यमंत्री ने बताया कि 1737 में इस तरह का भयंकर तूफान बंगाल में आया था। तब बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी। इस बार राज्य प्रशासन सतर्क था और समुद्र तटीय क्षेत्रों से पांच लाख लोगों को चक्रवात के आने से पहले ही सुरक्षित ठिकानों पर ले जाया गया था और शिविर लगाए गए थे। इस वजह से जान का नुकसान कम हुआ लेकिन लाखों की संख्या में मकान, फसलें और पेड़ पौधों की भारी क्षति हुई है। उन्होंने बताया कि नदियों के बांध टूट गए हैं और उत्तर तथा दक्षिण 24 परगना पूरी तरह से जलमग्न है। संचार व्यवस्था पूरी तरह से ठप है। बिजली आपूर्ति रोक दी गई है। टेलीफोन संचार भी बंद हो गए हैं। कुल मिलाकर कहा जाए तो ये दोनों जिले राज्य के बाकी हिस्से से कट गए हैं।