पूर्व मंत्री बादशाह सिंह थामेंगे सपा का दामन, एक और मंत्री की भाजपा छोड़ने की चर्चा

लखनऊ। बुंदेलखंड के कद्दावर नेता और 4 बार विधायक व बसपा शासनकाल में श्रम मंत्री रहे बादशाह सिंह आज समाजवादी का दामन थाम सकते हैं। खबर है कि दोपहर 12 बजे बादशाह सिंह अपने समर्थकों के साथ समाजवादी पार्टी की सदस्यता लेंगे। फिलहाल, बादशाह सिंह कांग्रेस पार्टी में है, लेकिन आज सपा में शामिल हो सकते है।

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इसके साथ ही आज एक बार फिर कुछ विधायक औऱ एक मंत्री की समाजवादी पार्टी में शामिल होने की चर्चा है। खबर है कि मुकुट बिहारी वर्मा अपने बेटे के टिकट के लिए समाजवादी पार्टी में शामिल हो सकते है, लेकिन मंत्री लगातार इन खबरों को खारिज कर रहें है। मंत्री का दावा है कि वो मरते दम तक भाजपा का दामन नही छोड़ेगे।

कौन है बादशाह सिंह ?

बुंदेलखंड के महोबा जिले के बादशाह सिंह की किसी जमाने में कद्दावर नेताओं में गिनती होती रही है। बादशाह सिंह को बड़े ठाकुर नेता के तौर पर पहचान थी। उन्होंने हमीरपुर जिले से राजनीतिक सफर कई दशक पहले शुरू किया था।

बीजेपी के टिकट से वह मौदहा विधानसभा क्षेत्र से लगातार दो बार एमएलए रहे। बीजेपी से मोह भंग हो जाने के बाद बादशाह सिंह ने बीएसपी में एंट्री मारी और वह तीसरी बार विधायक बने। मायावती की सरकार में उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा सरकार बनी,तब बादशाह सिंह सियासी खेल में हाशिए पर एक तरह से आ गए। हालांकि, अब वह कांग्रेस पार्टी में हैं।

समाजवादी सरकार में हुई थी जेल

साल 2012 में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद बादशाह सिंह, पूर्ववर्ती मायावती सरकार के पहले मंत्री बने जिन्हें भष्टाचार के आरोप में जेल की हवा खानी पड़ी। सहकारिता विभाग की निर्माण इकाई ‘श्रम एवं निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड’ ,लेकफेड में बीएसपी सरकार के दौरान हुए 1,000 करोड़ रु. से अधिक के घोटाले में बादशाह सिंह का नाम उस कड़ी के रूप में सामने आया जिसने लेकफेड को काम दिलाने के एवज में घूस ली। इसके बाद बादशाह सिंह गिरफ्तार भी हुए और जेल भी गए।

बुंदेलखंड में न्याय की लड़ाई के लिए बनाई थी इंसाफ सेना

बताया जाता है कि हैं कि राजनीतिक में आने से पहले बादशाह सिंह इंसाफ सेना का गठन किया था। इंसाफ सेना बुंदेलखंड क्षेत्र में हर जगह सक्रिय थी, लेकिन सियासी खेल में शिखर तक पहुंचने के बाद अब बादशाह सिंह ने अपनी राजनीतिक विरासत अपने पुत्र सूर्यदेव सिंह को देने का मन बनाया है। इसीलिए फिलहाल समाजवादी पार्टी में शामिल होने जा रहें है।

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