पेट्रोलियम की कीमतों में लग रही आग बुझाने उतरी केन्द्र सरकार

नई दिल्ली। पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों से जहां पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है वहीं इस मुद्दे पर पहले हाथ उठा चुकी केन्द्र सरकार लोगों की बढ़ती नाराजगी को देखते हुए पेट्रोलियम के बढ़ते दामों और गिरते रूपये को थामने के लिए कदम बढ़ाने लगी है। इसी सिलसिले में आज पीएम मोदी द्वारा एक मीटिंग बुलाई गयी। सूत्रों के अनुसार बयान में कहा गया है प्रधानमंत्री मोदी ने अन्य बाजारों की तरह ही तेल बाजार में उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच मजबूत साझेदारी की वकालत की। सूत्रों ने बताया कि बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भारत जैसे बड़े तेल उपभोक्ता देशों की चिंताएं बढ़ी हैं क्योंकि इससे रिटेल पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के दाम बहुत ज्यादा हो चुके हैं।

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भारत और विदेश दोनों से तेल और गैस क्षेत्र के सीईओ और विशेषज्ञों ने सोमवार को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली और धर्मेंद्र प्रधान, डॉ राजीव कुमार भी मौजूद थे। इस बैठक में ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने के बाद कच्चा तेल के आयात पर पडऩे वाले असर की भरपाई के लिए घरेलू तेल कंपनियों ने सऊदी अरब और इराक जैसे अन्य निर्यातकों के साथ पर्याप्त समझौते कर लिए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने यह जानकारी बैठक के दौरान दी। भारत ने वित्त वर्ष 2017-18 में ईरान से 226 लाख टन कच्चा तेल को खरीदा था। मौजूदा वित्त वर्ष के लिए ईरान से करीब 250 लाख टन कच्चा तेल का सौदा हो गया है।

नवंबर माह से अमेरिका के प्रतिबंध लागू होने के बाद से ईरान से कच्चा तेल खरीदने में काफी परेशानी होगी। इससे आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों के सामने संकट पैदा होने की आशंका के बादल मंडला रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि ईरान से तेल आयात प्रभावित होने पर उसके लिए सऊदी अरब, इराक और दूसरे आपूर्तिकर्ताओं से करने का विकल्प अच्छा होगा। इसके लिए सम्बंधित देशों से जरूरी समझौते भी किए जा चुके हैं। इस महीने के आखिर तक ईरान से तेल की सप्लाई में कोई समस्या नहीं आनी है। उन्होंने बताया कि सिर्फ 5 महीनों के लिए तेल आपूर्ति के करार पर ही खतरा मंडरा रहा है।

अधिकारी ने कहा कि इस महीने के अंत तक ईरान के कच्चे तेल की आपूर्ति में कोई संकट नहीं है। समस्या सिर्फ शेष बचे पांच महीनों के लिए होगी। इनकी भरपाई आसानी से सऊदी अरब, इराक और अन्य देशों के साथ हुए अतिरिक्त सौदे से की जा सकेंगे। उन्होंने बताया कि यदि ईरान से कच्चे तेल का आयात पूरी तरह से बंद हो जाए तब भी देश की तेल शोधन कंपनियों को कोई परेशानी नहीं होगी। भारत अपने पारंपरिक मित्र देश ईरान से कच्चा तेल की खरीद बंद नहीं करने वाला है।

इंडियन ऑइल और मंगलोर रिफाइनरी पहले ही ईरान से नवंबर में 12.5 लाख टन कच्चा तेल खरीदने का सौदा कर चुकी हैं। इस विकल्प पर भी विचार कर रहे हैं कि अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने के बाद ईरान को रुपए में ही भुगतान किया जाए। उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने 4 नवंबर के बाद ईरान से तेल खरीदने वाले देशों के खिलाफ प्रतिबंधों का आह्वान कर चुका है। भारत ईरान के कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है जबकि भारत के कुल कच्चे तेल आयात में ईरान की तीसरी सर्वाधिक हिस्सेदारी है।

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