नई दिल्ली। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे पर टिप्पणी करने के बाद कॉमेडियन कुणाल कामरा विवादों में आ गए हैं। कथित तौर पर कामरा ने एकनाथ शिंदे को गद्दार कहा था। हालांकि, उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया था।
डिप्टी सीएम पर टिप्पणी के बाद शिव सैनिकों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोला और उस जगह पर भी तोड़फोड़ की गई, जहां पर कुणाल कामरा का शो शूट हुआ था। विवादों के बीच कॉमेडियन कुणाल कामरा ने एक बार फिर सरकार पर निशाना साधा है। हालिया किए एक पोस्ट में कामरा ने सरकार पर आरोप लगाया कि विरोध जताने वाले कलाकारों को चुप करने का एक व्यवस्थित अभियान चलाया जा रहा है।
कुणाल कामरा की नई पोस्ट में क्या?
बुधवार को कॉमेडियन कुणाल कामरा ने एक पोस्ट शेयर किया। इस पोस्ट का शीर्षक उन्होंने ‘लोकतांत्रिक तरीके से कैसे एक कलाकार की हत्या की जाए’ दिया। इसमें उन्होंने इस पोस्ट में कुछ प्वाइंटस शेयर की है और कहा कि सरकार विरोध की आवाज को दबाने के लिए ये तरीके अपनाती है। कुणाल कामरा ने अपने पोस्ट में इन पांच बातों का जिक्र किया है।
- इतना ज्यादा आक्रोश फैलाओ की कोई भी ब्रांड उस कलाकार के साथ काम करना बंद कर दें।
- इतना ज्यादा विवाद पैदा कर दो कि प्राइवेट और कॉरपोरेट शो भी रद कर दिए जाएं।
- इतनी हिंसक प्रतिक्रिया दो कि बड़े मंच भी उनको मौका देने से डरें।
- हिंसक आक्रोस इतना फैला दो कि छोटे दरवाजे भी बंद हो जाए।
- दर्शकों को धमका दीजिए फिर और कला को अपराध बना दो।
‘फिर बच जाते हैं दो विकल्प’
इसी पोस्ट में कॉमेडियन कुणाल कामरा ने लिखा कि इन सब के बाद किसी भी कलाकार के बाद केवल दो विकल्प बच जाते हैं। उन्होंने इन दो विकल्पों के बारे में बात करते हुए कहा कि या तो कलाकार अपनी आजादी गंवा दे और सत्ता के समर्थन का गाना गाने लगे। या फिर दूसरा रास्ता है कि वह चुपचाप गायब हो जाए। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरीके से राजनीतिक हथियार है, जो विरोध की आवाज को दबाने के लिए किया जा रहा।
पुलिस पर भी कामरा ने किया कटाक्ष
बता दें कि पूरे मामले में कॉमेडियन कुणाल कामरा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इसके बाद उन्हें दो बार थाने में पेश होने के लिए समन भी जारी किया जा चुका है। जब कॉमेडिन पेश नहीं हुए तो पुलिस उनके घर पहुंची। हालांकि, वहां पर कोई नहीं मिला। इसके बाद कामरा ने पुलिस पर भी कटाक्ष किया। कामरा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में अपनी तस्वीर साझा की और लिखा माहिम स्थित घर पर जाना समय और सार्वजनिक संसाधनों की बर्बादी है, क्योंकि वहां पर कोई नहीं रहता है।