लखनऊ। पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आगामी विधान सभा चुनाव लड़ने का एलान किया। उन्होंने कहा कि योगी ने जहां से भी चुनाव लड़ेंगे, वहां से अवश्य ही चुनाव लड़ेंगे। यह उनके लिए सिद्धांतों की लड़ाई है, जिसमें वे गलत के खिलाफ अपने विरोध को प्रकट करेंगे।
ठाकुर ने कहा कि योगी ने अपने मुख्यमंत्री के कार्यकाल में तमाम अलोकतांत्रिक, अराजक, दमनकारी, उत्पीड़नात्मक तथा विभेदकारी कार्य किये। वे इनके विरोध में चुनाव लड़ेंगे। उन्हें जितने भी वोट आयें पर वे यह अवश्य सुनिश्चित कर देंगे कि योगी द्वारा आदर्श संहिता का पूर्ण वास्तविक अनुपालन किया जाये।
पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने वीडियो जारी कर कहा है कि मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ ने तमाम लोकतांत्रिक, विभेदकारी, दमनकारी आचरण किये हैं और नीतियां बनाई गईं। इसके विरोध में अगामी विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां से भी चुनाव लड़ेंगे। वहां से वह चुनाव लड़ेंगे। अमिताभ ने कहा कि यह उनके लिए सिद्धांतों की लड़ाई है, जिसमें वे गलत के खिलाफ अपने विरोध को प्रकट करेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें जितने भी वोट आयें पर वे यह अवश्य सुनिश्चित कर देंगे कि, आदित्यनाथ द्वारा आदर्श संहिता का पूर्ण वास्तविक अनुपालन किया जाये।
सीएम योगी पर लगातार हमलावर
इससे पहले अमिताभ ठाकुर ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा था कि निगाहों में बेहद चुभने के कारण मैं तो आप लोगों के लिए भ्रष्ट, करप्ट, निकम्मा, निखट्टू, अनुशासनहीन, लापरवाह, कामचोर सब कुछ था। मुझे चलता कर दिया। पर मैं आपसे पूछता हूं योगी जी, क्या 5 साल में आपको भ्रष्ट आईएएस, आईपीएस का एक भी असल केस नहीं मिला?
जबकि लगातार गंभीर आरोप आते रहे। पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर लगातार सीएम योगी आदित्यनाथ पर हमला बोल रहे हैं। एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा कि मेरे जबरिया रिटायर पर राज्य सरकार का कोर्ट में जो जवाब मिला, उसका मुख्य मतलब है- जो कर दिया सो कर दिया बार-बार सिर्फ यही कहा कि सर्विस रिकॉर्ड देखा व बाहर किया पर एक शब्द भी नहीं बताया कि मेरे सर्विस रिकॉर्ड में दूसरों से अलग ऐसा क्या था जो निकालना जरूरी हो गया? यानी खुली मनमानी।
जानें अमिताभ ठाकुर के बारे में
1992 बैच के आईपीएस अमिताभ ठाकुर मूलरूप से बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले हैं। वह एक अच्छे लेखक, कवि और आरटीआई ऐक्टिविस्ट भी हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह के खिलाफ धमकी का केस भी दर्ज करावाया था। इसके बाद अखिलेश सरकार ने भी उनके खिलाफ केस दर्ज करवाया।
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार में अमिताभ ठाकुर के घर पर विजिलेंस की टीम ने छापा मारा था। इस दौरान अमिताभ ने आरोप लगाया था कि उनके खिलाफ जांच सीएम के इषारे पर की गई है। यही नहीं अमिताभ ठाकुर के खिलाफ कई विभागीय कार्रवाई भी हो चुकी हैं। उनकी पत्नी नूतन ठाकुर भी आरटीआई ऐक्टिविस्ट हैं। अमिताभ ठाकुर ने योगी सरकार में भी कई बार बदहाल कानून व्यवस्था को लेकर आवाज उठाई है।
अनिवार्य सेवानिवृत्ति किया गया
दरअसल इसी साल मार्च में सरकार ने साल 1992 बैच के यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी थी। हालांकि आम भाषा में इसे जबरन रिटायरमेंट भी कहते हैं।
भारतीय पुलिस सेवा से बाहर निकाले जाने के बाद अमिताभ ठाकुर ने अपने घर के बाहर लगी नेम प्लेट में ‘जबरिया रिटायर आईपीएस’ लिखवा लिया था। अमिताभ ठाकुर को जिस वक्त सेवा से बाहर किया गया था उस वक्त वे आईजी (रूल्स एंड मैनुएल्स) के पद पर तैनात थे। दूसरे अफसरों की तरह उन्हें फेयरवेल आदि भी नहीं दिया गया था।