नई दिल्ली। राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट से झटका खाने के बाद भी कांग्रेस इस मुद्दे को ठंडा नहीं होने देना चाहती है। उसने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को छोटा बताते हुए जेपीसी से जांच की मांग आज फिर दोहराई है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राफेल डील की याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इस दौरान कोर्ट ने कहा था कि राफेल की कीमत से जुड़े विवरण सीएजी से साझा किए जा चुके हैं और कंपट्रोलर एंड ऑॅडिटर जनरल (सीएजी) की रिपोर्ट की जांच-परख लोक लेखा समिति (पीएसी) कर चुकी है।
इस बीच, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बाद शनिवार को पीएसी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने कहा कि मैं लोक लेखा समिति के सभी सदस्यों से अनुरोध करूंगा कि अटॉर्नी जनरल और सीएजी को यह बात पूछने के लिए तलब करें कि राफेल सौदे पर सीएजी की रिपोर्ट संसद में कब पेश की गई। ठीक 24 घंटे बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कानूनी पहलुओं पर केंद्र सरकार को घेरा। शनिवार को उन्होंने फैसले के कई पैरे पढ़े और पूछा कि सुप्रीम कोर्ट ने क्लीन चिट कहां दी है, जैसा कि यह सरकार दावा कर रही है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फाइलें नहीं मंगवाई और नोटिंग नहीं देखी तो फिर अपनी पीठ थपथपाना कि ‘क्लीन चिट’ मिल गया ये बचकानी बातें हैं।
उन्होंने आगे कहा कि 2G, कोल स्कैम में क्या हुआ था? तमाम आरोप लगाए गए लेकिन आरोप फिक्शन निकले। हम साबित करके रहेंगे कि राफेल केस में हम सही हैं। इसके अलावा चुनावों से पहले अमित शाह के बयान पर उन्होंने कहा कि हम उन्हें दूरबीन भेंट करेंगे। दरअसल, अमित शाह ने पहले कहा था कि चुनाव बाद दूरबीन से देखने पर भी कांग्रेस कहीं नहीं दिखेगी।
सरकार को राफेल सौदे पर सीएजी की रिपोर्ट के बारे में गलत तथ्य पेश कर सुप्रीम कोर्ट को ‘गुमराह’ करने के लिए माफी मांगनी चाहिए। हम कोर्ट का सम्मान करते हैं, लेकिन यह जांच एजेंसी नहीं है। सिर्फ जेपीसी राफेल सौदे की जांच कर सकती है। शुक्रवार को पीएसी के मामले पर राहुल ने कहा था कि आज की दुनिया में हो सकता है कि मोदीजी ने अपनी पीएसी प्रधानमंत्री कार्यालय में बैठा रखी हो। भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने खडग़े पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर उन्हें रिपोर्ट नहीं मिली तो कोर्ट में जाकर एफिडेविट या रिव्यू पीटिशन दायर कीजिए।