
भदोही। लॉकडाउन के दौरान रामानंद सागर निर्मित रामायण का प्रसारण 33 साल बाद दूरदर्शन पर किए जाने से एक तरफ मौजूदा नई पीढ़ी का रुझान बढ़ा है तो दूसरी तरफ दूरदर्शन की टीआरपी भी बढ़ गई है। लोगों को शायद ही मालूम होगा कि रामायण के कई कलाकारों ने एक से अधिक भूमिकाएं निभाई थीं। रामायण में जामवंत का जीवंत अभिनय करने वाले राजशेखर उपाध्याय ने पांच से अधिक भूमिकाएं निभाई थी।
हरिहरपुर गांव के हैं राजशेखर उपाध्याय
राजशेखर उपाध्याय भदोही जिले के हरिहरपुर गांव के मूल निवासी हैं। मुम्बई में वह छोटे पर्दे की दुनिया में बड़ा नाम कमा चुके हैं। उन्होंने कई फिल्मों और टीवी सीरियल में काम करने के साथ टीवी सीरियल और फिल्मों का निर्माण भी किया है। सागर आर्ट की तरफ से निर्मित रामायण सीरियल पर उन्होंने विशेष बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कई रोचक जानकारी भी दी, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं।
राम-जामवंत संवाद में कभी नहीं हुआ रीटेक सीन
रामायण के जामवंत ने बताया कि उन्होंने जामवंत के अलावा पांच और किरदारों को निभाया था। इसके पूर्व उन्होंने विक्रम बेताल में काम किया। यह सीरियल भी सागर आर्ट की तरफ से बनाया गया था। इनमें सबसे अधिक मेरी लोकप्रिय भूमिका जामवंत की रही। इसमें श्रीराम और मेरे बीच 18 पेज का संवाद था। श्रीराम की भूमिका निभाने वाले अरुण गोविल और हमारे बीच फिल्मांकन के दौरान कभी कोई रीटेक सीन नहीं देना पड़ा। उपाध्याय ने बताया कि ढाई साल से अधिक समय तक रामायण की शूटिंग उमरगांव में चली थी। 187 एपिसोड का निर्माण हुआ था। इसका पहला प्रसारण जून 1887 से हुआ था।
कई अन्य किरदारों में भी दिखाया दम
राजशेखर उपाध्याय ने बताया कि हमने जामवंत के अलावा श्रीधर, खर के बेटे मकराक्ष, अग्निदेव, दैत्य गुरु शुक्राचार्य और अयोध्या के राजा श्रीराम के गुप्तचर आर्य सुमागध की भूमिका भी निभाई। श्रीराम और रावण दोनों दलों में हमने अभिनय किया। एक अभिनय हमने विभीषण के मंत्री का भी किया। जब रावण ने विभीषण को लंका से निकाल दिया था तो हम उसके साथ श्रीराम के पास आकाश मार्ग से समुद्र पार कर श्रीराम की शरण में आए। श्रीधर की भूमिका में हम राम वनवास के बाद गुरु वशिष्ठ के आदेश के बाद इसकी सूचना भरत को देने गए थे।
राजशेखर उपाध्याय बताते हैं कि अग्निदेव की भूमिका में श्रीराम के आदेश पर मां सीता की अग्निपरीक्षा हुई थीं। शुक्रचार्य के रुप में हमने मेघनाथ का यज्ञ कराया था। मकराक्ष बनकर हमने 21 रुप धारण कर श्रीराम से युद्ध किया था क्योंकि मेरे पिता खर का श्रीराम ने वध किया था। इसके बाद हमारी मां ने श्रीराम की खोपड़ी में स्नान की प्रतिज्ञा की थी जबकि आर्य सुमागध अयोध्या का गुप्तचर था। उस किरदार में श्रीराम ने मेरे साथ गुप्त रुप से नगर का भ्रमण किया था और प्रजा में अपने राज के बारे में सही जानकारी हासिल की, जिसके बाद सीता का अयोध्या से निष्कासन हुआ।
‘विभीषण’ के लिए हुआ चयन, बाद में मिला जामवंत का रोल
जामवंत ने बताया कि इसके पूर्व उन्हें विभीषण की भूमिका दी गई थी लेकिन, रामानंद सागर मुझे बेहद सम्मान देते थे और सलाह भी मानते थे। उन्होंने मुझे जामवंत की भूमिका दिलाई। सागर ने कहा यह अभिनय बेहद चर्चित होगा। उन्होंने बताया कि मेरी आवाज अधिक बुलंद थीं। सागर यानी बाबू जी मुझे पंडितजी कह कर बुलाते थे, नाम कभी नहीं लेते थे क्योंकि उस समय कलाकारों का बेहद अकाल था। इसलिए अच्छे कलाकार नहीं मिल पाते थे। इसलिए कई रामायण के कलाकारों ने एक से अधिक भूमिकाएं निभाई हैं।
रामानंद सागर करते थे तारीफ
उन्होंने कहा कि जब कोई अच्छी भूमिका होती थीं तो बाबू जी सीधे बोलते थे कि यह रोल दमदार है और पंडितजी की आवाज अच्छी है, इस अभिनय को वही जीवंत करेंगे। इस वजह से हमने जामवंत के अलावा पांच भूमिका निभाई।
लॉकडाउन में पुनः रामायण के प्रसारण से एक बार फिर 33 साल पुरानी याद ताजा हो गई हैंं। रामानंद सागर और उनके परिवार ने रामायण सीरियल को अमर कृति बना दिया है। श्रीराम के आदर्श चरित्र को उन्होंने आमजन तक पहुंचाया है। सरकार को उन्हें सम्मानित करना चाहिए।
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