राहत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टैरिफ बदले के प्रस्ताव पर लगाई रोक, आयोग से जवाब तलब

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के करीब तीन करोड़ बिजली उपभेक्ताओं को बड़ी राहत दी है। अब आठ जुलाई तक प्रदेश में बिजली की दरें नहीं बढ़ेगी। हाईकोर्ट ने टैरिफ बदलने के उस प्रस्ताव पर ही रोक लगा दी है, जिसमें बिजली की दरें बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है। इस मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग से जवाब तलब किया है। आयोग को आठ जुलाई तक जवाबी हलफनामा दाखिल करने का समय दिया गया है।

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प्रस्ताव में नियमों की अनदेखी का है आरोप
बिजली की दरों को बढ़ाने के लिए जो टैरिफ में बदलाव किया जा रहा है, उसमें नियमों की अनदेखी करने का अरोप लगा है। याची ने कोर्ट को बताया है कि अखबारों में पब्लिक नोटिस और उसके बाद जनसुनवाई के नियम का पालन नहीं किया गया है। इसपर अदालत ने पूछा कि क्यों नहीं किया गया नियमों का पालन?

आयोग ने वर्चुअल सुनवाई की खानापूर्ति की
राज्य विद्युत नियामक आयोग ने 21 अप्रैल के नोटिस पर पांच मई 21 को होने वाली जन सुनवाई कोविड-19 प्रकोप के कारण टाल दी थी। इसके बाद 10 मई को नोटिस जारी कर 19 मई को सुनवाई की तिथि मुकर्रर की थी। उस समय कोरोना अपने पीक पर था।

आयोग ने मनमानी करते हुए बावजूद इसके वर्चुअल सुनवाई की खानापूर्ति की। यही नहीं टैरिफ को अंतिम मंजूरी देने की भी पूरी तैयारी थी। याचियों को सुनवाई का मौका ही नहीं दिया गया। कोट ने कहा कि ऐसा न कर टैरिफ को अंतिम रूप देना विधि विरुद्ध है।

आयोग ने 19 मई को टैरिफ में बदलाव का तैयार किया था प्रस्ताव
प्रयागराज के अरविंद अग्रवाल व दो अन्य ने इस टैरिफ में बदलाव की प्रक्रिया को चैलेंज करते हए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस साधना रानी ठाकुर की डबल बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। याचिका में आयोग के प्रस्ताव को रद्द किए जाने की मांग की गई है। आयोग ने 19 मई को टैरिफ में बदलाव के लिए प्रस्ताव तैयार किया था।

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