नयी दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक आज अपनी करेंसी पालिसी की समीक्षा करेगा। चुनावी साल करीब होने के कारण सभी की निगाहें इस समीक्षा पर टिकी है। वहीं माना जा रहा है कि बारिश का मौसम होने के कारण महंगाई में भी वृद्वि हो सकती है। उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2018.19 की पहली छमाही के दौरान खुदरा मूल्य पर आधारित महंगाई की दर के 4.8 से 4.9 फीसदी के बीच रहने की संभावना जताई है। चालू वर्ष की दूसरी छमाही के दौरान इसके 4.7 फीसदी पर रहने का अनुमान जताया गया है। इससे पूर्व के अनुमान में पहली छमाही 4.7.5.1 फीसदी और दूसरी छमाही में 4.4 फीसदी रहने का अनुमान व्यक्त किया गया था।
वहीं बाजार पर करीब से निगाह रखने वाले सूत्रों के अनुसार अनुमान है कि लोन लेना और महंगा हो जाएगा। आरबीआई रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर सकता है, जिससे यह 6.50 फीसदी होने की उम्मीद है। अगर आरबीआई रेपो रेट में बदलाव करता है तो इसका असर तुरंत देखने को मिलेगा, क्योंकि बैंक सभी प्रकार के लोन पर ब्याज दरों को बढ़ा देंगे। खुदरा महंगाई दर के मई में चार महीने के ऊपरी स्तर 4.87 फीसदी पर पहुंचने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अगस्त में अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में फिर एक बार मुख्य ब्याज दर में वृद्धि करने को बाध्य हो सकता है। यह बात विभिन्न विश्लेषकों ने कही। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक समीक्षा नीति से पहले भारतीय शेयर बाजार ने नया कीर्तिमान बनाया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही नए शिखर पर पहुंच गए। वहीं रुपये में सुस्ती देखने को मिली।
उल्लेखनीय है कि कई आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों ने माना है कि महंगाई दर और डॉलर के मुकाबले गिरते रुपये को काबू में रखने के लिए आरबीआई 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी करने को बाध्य होगा। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने कहा था कि मुख्य ब्याज दर बढ़ने से कारोबार करने की लागत बढ़ेगी और देश के कारोबारी निवेश की गति घटाने को बाध्य होंगे, जो कि विकास को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है। फ्रांस की ब्रोकरेज कंपनी बीएनपी पारिबा की एक रिपोर्ट में विश्लेषकों ने कहा है कि आगामी महीनों में विभिन्न कारणों से मुख्य क्षेत्रों की महंगाई और खुदरा महंगाई बढ़ने का अंदेशा है और हमारा मानना है कि आरबीआई एक बार और मुख्य ब्याज दर में 0.25 फीसदी बढ़ोतरी कर सकता है। यूबीएस सिक्योरिटीज ने भी कहा कि अगस्त में दर में वृद्धि की जा सकती है। यदि कच्चे तेल की कीमत मौजूदा स्तर पर बनी रहती है और मुख्य क्षेत्रों की महंगाई ऊपर की ओर बनी रहती है, तो अगली दर वृद्धि अगस्त में ही हो सकती है। शाम तक रिजर्व बैंक सभी बातें साफ कर देगा।