सरकार ने तय कर लिया है कि वह छल-कपट की राजनीति ही करेगी : अखिलेश

लखनऊ। सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर योगी सरकार पर हमला किया है। अखिलेश ने कहा है कि भाजपा सरकार ने तय कर लिया है कि वह असत्य के सिवा कुछ नहीं बोलेगी और अपने पूरे कार्यकाल में छल-कपट की राजनीति के अलावा कुछ नहीं करेगी। मंहगाई की मार से जनजीवन पूरी तरह से तबाह है। डीजल-पेट्रोल की दरों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है।

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अखिलेश ने आरोप लगाया कि बिजली महंगी करने पर भाजपा सरकार आमादा है। किसान घोर मुश्किल में फंसा है। किसानों के ऊपर तिहरी मार पड़ रही है। किसानों पर कोरोना का कहर टूट पड़ा है। यहां तक कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय को कहना पड़ा कि गांवों में चिकित्सा व्यवस्था राम भरोसे है। मंहगाई के कारण खेती-किसानी का काम रुक गया है, लेकिन फसल की लूट रुक नहीं रही है।

केन्द्रीय मंत्री को भी यह कहना पड़ा कि गेहूं की सरकारी खरीद में घोर लापरवाही है

अखिलेश यादव ने कहा कि राजधानी लखनऊ समेत तमाम जनपदों से गेहूं खरीद में भारी अनियमितताएं की सूचनाएं मिली हैं। किसान क्रय केन्द्रों पर गेहूं के लिए धक्के खा रहे हैं। केन्द्रीय मंत्री को भी यह कहने के लिए विवश होना पड़ा कि गेहूं की सरकारी खरीद में घोर लापरवाही है और क्रय केन्द्र बंद होने की आम शिकायतें हैं। भाजपा सरकार जानबूझकर किसानों को एमएसपी का लाभ नहीं देना चाहती है।

गेहूं खरीद में भी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था लागू कर दी गई है। गांवों के किसान को परेशानी में फंसाये रखने की यह भाजपाई साजिश का हिस्सा है। रजिस्ट्रेशन के बाद गेहूं का सैंपल पास कराना होता है, तब भी क्रय केन्द्रों में धांधली के कारण एमएसपी पर बिक्री नहीं होती है। धान की फसल के लिये प्रदेश में बीज का अभाव बना हुआ है।

किसान इतना बेबस कभी नहीं हुआ, जितना भाजपा राज में है

पूर्व सीएम अखिलेश ने कहा कि भाजपा के अंधेर राज में किसान की बदहाली और भाजपा की शह प्राप्त बिचौलियों की खुशहाली ही वांछित है। पहले धान की लूट हो ही चुकी है। गन्ना किसानों की कोई सुनने वाला नहीं है। उनके गन्ने का 15,000 करोड़ बकाये का भुगतान अभी भी लटका हुआ है।

देरी में भुगतान का ब्याज तो कभी मिलने वाला है नहीं। भले ही गेहूं का एमएसपी 1975 रुपए प्रति कुंतल घोषित है, लेकिन किसानों को 1500 रुपए प्रति कुंतल मिलने के कारण लाले पड़े हुए हैं। किसान इतना बेबस कभी नहीं हुआ, जितना भाजपा राज में है। भाजपा की प्राथमिकता में किसान दूर-दूर तक नहीं है। किसान का शोषण नहीं रुका तो वह इसका जवाब अवश्य देगें। इस बार किसानों की मार से भाजपा बच नहीं सकती।

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