लखनऊ। आद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने कहा है कि प्रदेश में अगले तीन सालों तक एमएसएमई यूनिट को चलाने के लिए किसी भी प्रकार की विशेष अनुमति की जरूरत नहीं पड़ेगी। सिर्फ संबंधित एमएसएमई यूनिट को औद्योगिक विभाग को लिखित सूचना देनी होगी।
उद्योगपतियों ने सरकार के इस पहल की सराहना करते हुए कहा की इससे व्यापार बढ़ेगा।औद्योगिक विकास मंत्री बुधवार को सीआईआई द्वारा आयोजित ई-इंटरेक्शन कार्यक्रम के दौरान यह बातें कहीं। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के पहले औद्योगिक क्षेत्र में बिजली की खपत 8600 मेगावॉट थी, जो अप्रैल में घटकर 3000 मेगावॉट रह गई। यह भी बताया की सरकार, जापान, कोरिया, अमेरिका आदि से आने वाले निवेश के अवसरों पर भी सक्रिय रूप से काम कर रही है।
प्रदेश के अंदर जो मजदूर अपने कार्य क्षेत्र वाले जिले में लौटना चाहते हैं। उन्हें किसी प्रकार के पास की जरूरत नहीं होगी। जो दूसरे राज्य में कार्यरत हैं उनके लिए पास की व्यवस्था की जाएगी। राज्य सरकार हालांकि उनके रोजगार की व्यवस्था यहीं करने में लगी है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा व गाजियाबाद के औद्योगिक इकाइयों में दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले श्रमिकों की समस्या का जल्द निवारण होगा।
औद्योगिक विकास मंत्री ने कहा कि उद्योगपति अपनी शिकायतें व सुझाव एमएसएमई साथी पोर्टल पर दर्ज कराएं। इसको भुगतान व समस्याओं के निवारण के लिए विकसित किया गया है। सीआईआई के चेयरमैन अंकित गुप्ता ने केंद्र सरकार द्वारा दिए राहत पैकेज की तारीफ करते हुए कहा कि यह प्रदेश और देश को आत्मानिर्भर बनाने में कारगर साबित होगा। मजदूर निति में सुधार न सिर्फ समय की मांग है बल्कि काफी महत्वपूर्ण भी है।
वाइस चेयरमैन सीपी गुप्ता बताया कि बुलंदशहर व गाजियाबाद में औद्योगिक इकाइयों को भूजल के अधिक उपयोग के कारण राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) अनुमति नहीं दी जा रही है। राजेश सिक्का चेयरमैन सीआईआई वेस्टर्न यूपी कौंसिल ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।