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ऑर्किड फार्मा के शेयरों ने लखपति से करोड़पति बनाया, फिर भी निवेश से बचने की सलाह

नई दिल्ली। अगर आपने पिछले साल नवंबर में ऑर्किड फार्मा का शेयर खरीदा होता, तो आज की तारीख आपको हर एक शेयर पर 118 गुना यानी 11,733% का रिटर्न मिला होता। ऐसे समझते हैं आपने 2020 में 3 नवंबर को शेयर के लिए 18 रुपए का भुगतान किया, वह 25 मार्च 2130 रुपए का हो गया है। मतलब की करीब 6 महीने में आपका 1 लाख रुपया 1.18 करोड़ रुपए हो गया। 25 मार्च को भी शेयर में 5% की बढ़त के साथ अपर सर्किट लगा।

लगातार 100 दिन तक शेयरों में लगा अपर सर्किट
दिवालिया घोषित होने के बाद ऑर्किड फार्मा को NCLT के रेजोल्यूशन प्लान के तहत धानुका लैब ने खरीदा था, जिसे 3 नवंबर 2020 को कंपनी ने इसे दोबारा शेयर बाजार में लिस्ट कराया था। लिस्टिंग के समय एक शेयर की कीमत 18 रुपए थी। खास बात यह है कि शेयर बाजार में दोबारा लिस्ट होने के बाद इस शेयर में हर दिन अपर सर्किट लगा। 3 नवंबर से 25 मार्च के बीच कुल 100 दिन ऐसे रहे जिस दिन बाजार में कारोबार हुआ और इन सभी दिनों शेयर में अपर सर्किट लगा।

शेयर से निवेशकों का कम ही फायदा
मार्केट एक्सपर्ट अविनाश गोरक्षकर की मानें तो इस तरह के शेयरों में निवेश से बचना चाहिए। क्योंकि लिक्विडिटी तो कम है ही साथ ही प्रमोटर की भारी-भरकम हिस्सेदारी भी चिंताजनक होती है। खास बात यह है कंपनी में रिटेल यानी छोटे निवेशकों की हिस्सेदारी 0.53% है, जबकि प्रमोटर की 98% से भी ज्यादा हिस्सेदारी है।

सेबी के नियम के मुताबिक अगले दो साल में इसे घटाकर 75% तक करना होगा, जिसे ऑफर फॉर सेल के जरिए बेचा जाएगा। इसमें भी रिटेल निवेशकों को कुछ नहीं मिलेगा, तो निवेश करने और इसमें इंट्रेस्ट रखने का ज्यादा मतलब नहीं।

कंपनी में प्रमोटर की हिस्सेदारी 98% से भी ज्यादा
देश की सबसे बड़ी फार्मा कंपनियों में शुमार ऑर्किड फार्मा की प्रमोटर यानी कंपनी पर मालिकाना हक धानुका लैब्स का है। कंपनी में धानुका लैब्स की हिस्सेदारी 98.04% है। बाकी 1.93% पब्लिक शेयर होल्डिंग्स है, जिसमें वित्तीय संस्थानों और बैकों की हिस्सेदारी 1.19% और रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी 0.51% शामिल है। BSE में ऑर्किड फार्मा की मार्केट वैल्यू 8,692 करोड़ रुपए है।

दुनियाभर के 40 देशों में फैला है कारोबार
कंपनी का कारोबार दुनियाभर के 40 देशों में फैला हुआ है। चालू वित्त वर्ष (2020-21) के शुरुआती 9 महीनों में कंपनी को 91.80 करोड़ रुपए का घाटा हुआ, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 92.21 करोड़ रुपए रहा था। हालांकि पूरे वित्त वर्ष के दौरान कंपनी को 131.07 करोड़ रुपए का घाटा हुआ।

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