लेखक-डॉ हिदायत अहमद खान
हम ही नहीं बल्कि दुनिया के अधिकांश देशों ने लगभग यह मान लिया है कि चीन ऐसा कुछ करने वाला है जिसकी कि किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। दरअसल जिस तेजी से चीन ने पाकिस्तान समेत अनेक विकासशील देशों की मदद के नाम पर अंदरुनी घुसपैठ करना की है उससे यही संदेश जा रहा है कि वो इन देशों को अपने पक्ष में करके किसी बड़ी ताकत को आंखें दिखाने की जुर्रत करने वाला है। इन देशों का ध्रुवीकरण सामान्यतौर पर व्यापार के लिए बाजार तलाशने की प्रक्रिया नहीं हो सकती है। इसके जरिए सच कहा जाए तो चीन स्वयंभू दुनिया के दरोगा बने विकसित और शक्तिशाली देश को धूल चटाने की दिशा में बहुत आगे बढ़ गया है। अगर यकीन नहीं आता तो उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के मामले को सामने रख कर विश्लेषण किया जा सकता है। किस प्रकार से किम जोंग उन ने चीन का सहारा लिया और अमेरिका को भी हजार बार सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर वह क्या करने जा रहा है और परिणाम में उसे क्या भुगतना पड़ सकता है। इसके चलते ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब किम जोंग उन को सबसे करीबी मित्र बताने से भी परहेज नहीं कर रहे हैं और हर संभव मदद की भी बात करते देखे जा रहे हैं। इससे अगर किसी की ताकत बढ़ी है तो वो चीन ही है, क्योंकि उसी के दिशानिर्देश पर उत्तर कोरिया ने कदम वापस लिए और पड़ोसी देश से दशकों पुरानी दुश्मनी को भी चंद पलों में खत्म करके आगे निकल गया।
बहरहाल यहां हम बात इंटरपोल की कर रहे हैं जिनके चीफ को चीन में कैद किया गया और साथ ही आरोप लगाया गया कि मेंग भ्रष्टाचार के आरोपी हैं, इसलिए उनसे पूछताछ की जा रही है। इसके साथ ही यह भी कह दिया गया कि मेंग इंटरपोल के चीफ होने से पहले चीन के नागरिक हैं और इसी दृष्टि से चीन उन्हें देखता है और उन पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। इस प्रकार एक ताकतबर इंसान के खिलाफ अब अनेक संगीन आरोप हैं, जिनकी जांच भी की जा रही है। यहां यह बतलाना भी उचित ही होगा कि मेंग होंगवेई कोई साधारण व्यक्ति नहीं हैं, जिनके मामले को यूं ही चलता है वाले अंदाज में सुना और भुला दिया जाए। हकीकत में वो उस इंटरपोल के हेड रहे हैं जो दुनिया के 192 देशों की कानून व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों के बीच एक सेतु की मानिंद प्रभावी काम करता है। इन देशों को अनेक बार इंटरपोल से मदद की गुहार भी लगानी पड़ती है और इसलिए उसके चीफ को यूं कैद कर लेना आसान बात नहीं है। इसलिए इस मामले में चीन द्वारा उठाए गए कदम की दुनियाभर में आलोचना हो रही है और इसे भविष्य में किसी बड़ी आफत के आने की ओर इशारा करने वाली घटना बताया जा रहा है।
गौरतलब है कि चार दिन पहले तक मेंग इंटरपोल के प्रेसिडेंट रहते हुए एक ऐसे ताकतवर इंसान थे, जिनकी तरफ कोई आंख उठाकर भी नहीं देख सकता था। अब वही ताकतबर इंसान चीन की गिरफ्त में हैं। खास बात यह है कि मेंग इससे पहले चीनी इंटरपोल के प्रेसिडेंट के तौर पर भी काम कर चुके हैं। इसलिए उन पर चीन की सरकार और उनकी भरोसेमंद एजेंसी की हमेशा से तीखी नजरें रही हैं। इस समय यदि खबरें सच बयां कर रही हैं तो शी जिनपिंग की सबसे भरोसेमंद और करीबी प्रोजेक्ट में से एक चीन की ‘एंटी करप्शन इन्वेस्टिंगेशन एजेंसी’ ने ही मेंग के खिलाफ यह कार्रवाई की है। गौरतलब है कि इससे पहले चीन की नंबर एक मानी जाने वाली अभिनेत्री फैन बिंगबिंग को भी इसी एजेंसी ने पूछताछ के लिए अपनी कैद में रखा था। मौजूदा वक्त में फैन बिंगबिंग उसकी कैद से वापस आ चुकी हैं और उन्होंने उन तमाम आरोपों को भी स्वीकार कर लिया है जो कि उन पर लगाए गए थे। मतलब कर चोरी की बात अभिनेत्री बिंगबिंग मान चुकी हैं और इसी के साथ उन्होंने हर्जाना भरने का वादा भी किया है।
इस अभिनेत्री पर आर्थिक और नैतिक आरोप लगाए गए थे, इसी तरह अब मेंग का मामला है, जिस पर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने बयान देते हुए कहा है कि ‘मेंग एक राष्ट्रीय निगरानी कमीशन की नई एंटी करप्शन यूनिट की निगरानी और जांच के लिए कैद में हैं। उन पर राज्य के कानूनों के गंभीर उल्लंघन का आरोप है।’ इसके अतिरिक्त किसी को कोई जानकारी नहीं है, क्योंकि एंटीकरप्शन जांच के चलते किसी को कोई विशेष जानकारी नहीं दी जाती है। इसलिए मेंग की अंतर्राष्ट्रीय ख्याति पर भी ज्यादा विचार नहीं किया गया है, क्योंकि ऐसा करना तो चीन में अब आम बात होती जा रही है। जहां तक चीनी कानून की बात है तो इसके मुताबिक किसी भी संदिग्ध को कैद करने के 24 घंटे में उसके जानकारी परिवार और इंप्लॉयर को देना होती है, लेकिन इस मामले में इसका भी ध्यान नहीं रखा गया है, इसलिए कहा जा रहा है कि कोई बड़ी घटना जरुर हुई है जिस कारण फौरी और गोपनीय ढंग से मेंग पर यह कार्रवाई की गई है।
बहरहाल दुनिया में जिस कदर उथल-पुथल मची हुई है उससे चीन के इरादे कुछ नेक नहीं लगते हैं, इसलिए भी मेंग के मामले को गंभीरता से लेने की बात कही जा रही है। अंतत: मेंग ऐसे पहले चीनी थे जिन्हें नवंबर 2016 में इंटरनेशनल इंटरपोल का प्रसिडेंट बनाया गया था। वे अपनी पत्नी और बच्चों के साथ फ्रांस के लियोन शहर स्थित इंटरपोल के ऑफिस में ही रह रहे थे। यही नहीं मेंग की इस नियुक्ति पर बीजिंग में खुशियां मनाई गईं थीं। तब माना गया था कि उनके जरिए चीन को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान हासिल हुआ है। समझा जा रहा था कि दुनिया ने चीन के क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम को सम्मान दिया है। बहरहाल मेंग की कैद से चीन के इरादों पर पानी भी फिर सकता है, क्योंकि इससे दुनिया के विश्वास को धक्का भी लग सकता है कि जिस शख्स पर दुनिया ने भरोसा जताया उसके खिलाफ ही बीजिंग इस तरह की कार्रवाई कर रहा है।