हस्तिनापुर की सीट पर कांग्रेस ने जिस अर्चना गौतम को टिकट दिया है, उनके छोटे कपड़े को लेकर भाजपा, हिंदू संगठनों ने कई तंज कसे हैं। कौरव-पांडवों के हस्तिनापुर में महाभारत एक महिला को लेकर हुआ था। तब दुनिया ने देखा कि उस हस्तिनापुर के हालात क्या हुए? आज उसी धरती की महिला प्रत्याशी पर जब छींटाकशी होने लगी तो उसका जवाब वो खुद दे रहीं हैं।
सवाल- आप पर कीचड़ उछाला जा रहा है, क्या कहेंगी?
जवाब- आप किसी लड़की को नहीं जानते तो आप उसके कपड़ों पर कीचड़ नहीं उछाल सकते। कपड़ों से कैरेक्टर डिसाइड नहीं कर सकते कि वह कैसी है? महिला को कपड़े पहनने अपने तरीके से जीने का हक है। मैं ही नहीं हर लड़की जो छोटे कपड़े पहनती हैं या अपने तरीके से रहती हैं उन पर कीचड़ उछालने का हक किसी को नहीं है। बाबा साहेब ने सभी महिलाओं को अपने हिसाब से जीने की आजादी दी है।

सवाल- आपके छोटे कपड़ों पर सवाल उठ रहे हैं?
जवाब- मेरे छोटे कपड़ों को लेकर जो मुद्दे उठ रहे हैं वो गलत हैं। ये सब बोलने वाले लोगों को सोचना चाहिए मैंने अकेली ने छोटे कपड़े नहीं पहने हैं। हेमामालिनी, जया प्रदा, जया बच्चन, स्मृति ईरानी ने भी एक्टिंग की थी। सभी पर बात होनी चाहिए। मुझ अकेले पर बात क्यों।
सवाल- हस्तिनापुर से चुनाव लड़ रही हैं, जहां द्रौपदी का अपमान हुआ, आज वहीं फिर एक महिला का अपमान हो रहा है?
जवाब- जो लोग ऐसा बोल रहे हैं मुझ पर कीचड़ उछाल रहे हैं तो उन्हें ये देखना चाहिए मैं भी किसी की बेटी हूं, बहन हूं, उनके अपने घरों में भी बहन बेटियां हैं, एक बार अपने घर में देखें। लगातार मुझ पर लांछन लगा रहे हैं ये गलत है, महिला को देश में जीने का हक है। हस्तिनापुर मेरा घर है। मैं वहां की बेटी हूं, मैं एक छोटे शहर की लड़की मुंबई तक जाती हूं, वहां अपने पैरों पर खड़े होकर वापस अपने गांव में आती हूं तो ये मैं गलत नहीं कर रही हूं।

सवाल- सोशल मीडिया पर आपको ट्रोल कर रहे हैं। कौन हैं ये लोग?
जवाब- कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना, मैं इसके बारे में नहीं सोचती।
सवाल- आपकी एक लड़ाई चुनाव है, दूसरी लड़ाई गलत सोच से है, इसे कैसे जीतेंगी?
जवाब- महिलाओं को जंग जीतनी पड़ती है चाहे वो ससुराल की जंग हो या मायके की, लोग महिलाओं को जीने नहीं देते। हमारे देश में बलात्कार के केस बढ़ते जा रहे हैं। मैं लड़की हूं, लड़ सकती हूं, पर आगे बढ़कर महिलाओं के लिए कुछ करना चाहती हूं। हस्तिनापुर को द्रौपदी ने श्राप दिया था कि यहां कोई तरक्की नहीं हो पाएगी। मैं हस्तिनापुर को उस श्राप से मुक्त करना चाहती हूं। इसे विकसित शहर बनाना चाहती हूं।