15 मई तक क्यों नहीं पूरी हुई 12 हजार से मदरसों की जांच? चेयरमैन का सख्त रुख

लखनऊ। केन्द्र सरकार की मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत प्रदेश में चल रहे बारह हजार से अधिक मदरसों की जांच तय समय सीमा 15 मई तक पूरी नहीं हो पाई है। शासन को कुछ जिलों से रिपोर्ट मिली है और अधिकांश जिलों में अभी जांच जारी है।

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समय से जांच पूरी न होने और इन दिनों जांच की वजह से मदरसों की पढ़ाई प्रभावित होने पर उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के चेयरमैन डा.इफ्तिखार अहमद जावेद ने सख्त नाराजगी जतायी है। अब परिषद स्वयं गैर अनुदानित मदरसों का सर्वे करवाएगा।

शासन के उप सचिव शकील अहमद सिद्दीकी की तरफ से 26 अप्रैल को उ.प्र.मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार को एक पत्र भेजा गया था। इसमें मदरसों की  अवस्थापना सुविधाओं की जांच पूरी करवा कर सम्बंधित जिलाधिकारी के जरिये 15 मई तक शासन को उपलब्ध करवाई जाए। जांच में मदरसे की भूमि, भवन, किरायानामा आदि की जांच की जानी है।

मदरसा शिक्षा परिषद के चेयरमैन डा.जावेद का कहना है कि जांच से पता लग सकेगा बारह हजार से अधिक इन आधुनिक मदरसों में कितने अस्तित्व में हैं और कितने फर्जी हैं और इन मदरसों में शिक्षकों को केन्द्र से वेतन दिये जाने का औचित्य है भी कि नहीं आदि प्रश्नों का समाधान हो सके।

उन्होंने लखनऊ के एक मदरसे में बाल उत्पीड़न की घटना के बाद उत्तर प्रदेश बाल आयोग द्वारा प्रदेश के सभी मदरसों की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि बाल आयोग के सदस्य मदरसों के प्रबंधकों से उनकी मान्यता, शिक्षकों की योग्यता, पाठ्यक्रम आदि के बारे में पूछताछ कर रहे हैं जबकि उनकी जांच का दायरा सिर्फ बाल उत्पीड़न तक सीमित होना चाहिए।

इसी क्रम में परिषद के रजिस्ट्रार जगमोहन सिंह ने भी कहा कि बाल आयोग की जांच के दायरे में सिर्फ मदरसों में बाल उत्पीड़न का ही मामला आता है बाकी विषयों पर जांच का उन्हें कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि अब मदरसा शिक्षा परिषद खुद प्रदेश के सभी गैर अनुदानित मदरसों का सर्वे करवाएगा।

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