ईद उल फितर पर 32 लाख मुसलमानों को ‘सौगात ए मोदी ‘ देने का ड्रामा स्टेज किया जा रहा है। ‘सौगात ‘ के रूप में औरतों को सलवार-कुर्ते का और मर्दों को कुर्ते-पायजामे का कपड़ा, चीनी, सूजी, सेवइयां, दूध, चीनी, मेवे दिये जा रहे हैं। पता नहीं आज की तारीख में पांच-छह सौ रुपए में हिंदुस्तान के किस कोने में इतना सारा सामान आ जाता है। होगी मोदी जी के पास कोई जादू की छड़ी, जिसकी खबर उन्होंने आज तक जनता को नहीं दी है! इतने में तो दूसरे दर्जे के नागरिकों के लिए तीसरे दर्जे का सामान भी नहीं आ सकता!
बताया गया है कि खुद बीजेपी के 32 हजार पदाधिकारियों ने 32 हजार मस्जिदों में जाकर 32 लाख जरूरतमंद मुसलमानों को सौगातों की ये थैलियां दी हैं, दे रहे हैं। और 32 लाख को ही क्यों, बाकी करोड़ों मुसलमानों को क्यों नहीं, यह भी एक सवाल है। और ईद पर बच्चों के लिए कुछ नहीं, यह भी अजीब है पर छोड़िए इसे। मोदी जी ब्रह्मचारी हैं न! 32 लाख और 32 हजार के आंकड़े का हो सकता है, मोदी जी का अपना कोई गणित हो। हो सकता है यह उनका भाग्यांक हो! हो सकता है भाजपा की नजर में 32 लाख मुसलमान ही ऐसे हैं, जिनकी ईद, इस सौगात के बगैर नहीं मन पाती!
कितनी दयालु है बीजेपी और उसके चरम-परम-धरम- गरम नेता! जरूरतमंद मुसलमानों का कितना ज्यादा ख़याल रखते हैं! पिछले लगभग 11 सालों से वे, उनकी पार्टी और उनके पट्ठे एक ही काम तो मिशन मोड पर कर रहे हैं- वह है-मुसलमानों का ज्यादा से ज्यादा खयाल रखना! इतना अधिक ध्यान रखना कि मुसलमान हिले भी तो इनकी आज्ञा लेकर! इस बार उत्तर प्रदेश में अलविदा जुमा और ईद की नमाज़ सड़क पर तो छोड़ो, घरों की छतों पर करना तक मना हो गया है क्योंकि उनके बोझ से छत गिर सकती है और ऐन ईद के दिन बेचारे मुसलमान गिरकर मर सकते हैं! इतना खयाल तो मां- बाप भी अपने बच्चों का नहीं रखते, जितना कि मोदी जी और योगी जी एंड कंपनी रख रही है! उधर हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री को राज्य की वित्तीय बहबूदी की इतनी अधिक फिक्र है कि उन्होंने ईद की छुट्टी रद्द कर दी है! ये सब भी अपनी-अपनी तरह की ईद की सौगातें हैं!
अरे हां सबसे पहले तो मुझे मोदी जी का शुक्रिया अदा करना चाहिए था कि उन्हें सबसे पहले 2002 में मुसलमानों की जबरदस्त याद आई थी और फिर अब जाकर आई है। बीच में एक बार और भी काफी याद आई थी, जब एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था कि 2002 में मुसलमानों की मौत से उन्हें उतना ही अफसोस हुआ है, जितना कि कुत्ते के पिल्ले के गाड़ी के नीचे कुचल जाने से होता है। यह उनकी पहली और बड़ी सौगात मुसलमानों को थी। और हां, मैं कितना भुल्लकड़ हूं, उन्हें तब भी इनकी याद आई थी, जब उन्होंने कहा था कि मुसलमानों को तो उनके कपड़ों से पहचाना जा सकता है। इसी पहचान की पुख्ता करने के लिए ही उन्होंने ईद की सौगात के रूप में कपड़े भेजे हैं,ताकि उनकी यह पहचान कहीं मिट न जाए! कहीं उन्हें पहचानने में गड़बड़ी न हो जाए!
कितना ध्यान रखते हैं मोदी जी आप मुसलमानों का, मेरी तो आंखों में आंसू आ रहे हैं और बंद ही नहीं हो रहे हैं! डाक्टर कहते हैं ये खुशी के आंसू हैं, जितने बहा सकते हो, बहाओ! मैंने कहा इससे दिल्ली शहर में बाढ़ आ गई तो, उन्होंने कहा मोदी जी, बचपन से तैराकी जानते हैं! बच जाएंगे।
और मोदी जी, अब कुछ और किस्म की बातें भी कर लें। मुसलमान एक गरीब कौम जरूर है पर ईद मना लेने की फिर भी उसकी हैसियत है। ईद पर हर मुसलमान नए कपड़े नहीं पहन सकता तो भी धुले और साफ-सुथरे कपड़े तो पहन ही सकता है और सौगात के लिए वह उम्मीद से कतई उनकी तरफ तो बिलकुल नहीं देखता, जिनके दिलों में उनके लिए केवल नफरत है। मोदी जी, नफ़रत का भंडार तो उस आदमी ने भी अपने दिल के किसी कोने में छुपा रखा है, जिसने आम चुनाव के समय कहा था कि जिस दिन से मैं हिन्दू -मुस्लिम करने लगूंगा, उस दिन से सार्वजनिक जीवन में रहने के योग्य नहीं रहूंगा। आपको याद हो न हो मगर मोदी जी,वही शख्स फिर अगले एक- दो दिन बाद ही हिंदू मुस्लिम करने लगा था! और मोदी जी,वह शख्स जो कहता घूमता है कि ईद के दिन मेरे घर पर चूल्हा नहीं जलता था क्योंकि मुस्लिम घरों से खाने- पीना आ जाता था, वही आदमी, वही नेता बरसों से ईद का वही कर्ज मुसलमानों के खिलाफ नफ़रत उगल- उगल कर चुका रहा है और आगे भी चुकाएगा!
और मोदी जी, आपसे क्या छिपाना, उसी शख्स के मंत्रिमंडल में ऐसे मंत्री भरे पड़े हैं, जो मुसलमानों के खिलाफ रोज नफ़रत उगलते हैं। उसी के मंत्रिमंडल की शोभा वह मंत्री भी बढ़ाता रहा, जिसने खुलेआम ‘गोली मारो सालों को’ कहा था। उसी के बनाए मुख्यमंत्री आज सुप्रीम कोर्ट की परवाह न करते हुए गरीब मुसलमानों के घरों, दुकानों पर बुलडोजर चला रहे हैं। बुलडोजर का गुणगान पिछले सत्तर साल में नहीं हुआ था, अब तो बुलडोजर बाबा भक्तों के बीच बहुत ‘सम्मानित’ नाम बन चुका है!
मोदी जी आप जो सौगात मुसलमानों को ही क्या पूरे हिन्दुस्तान को दे सकते थे,वह थी सुकून की जिंदगी। सुकून के दिन और सुकून की रातें,जो आप दे नहीं सकते। आप अरब के शाहों – शहंशाहों का तो स्वागत करते हैं,उनसे भी स्वागत करवाते रहते हैं, उन्हें गले लगाते रहते हैं, उनके मुल्कों की मस्जिदों को देखने बुलाया जाता है तो आप जाते हैं मगर अपने मुल्क के मुसलमानों के न कभी आप गले मिले और न एक दिन के लिए किसी मस्जिद में गए। आपने तो इफ्तार की दावतें तक बंद करवा दीं! ऐसा मुस्लिम प्रेम कभी देखा नहीं।
आपके ही राज में भगवा गुंडे दंगे करवाते हैं और गिरफ्तार अक्सर मुसलमान होते हैं। मुसलमान क्या खाएं, क्या पिएं, झटका मीट खाएं या हलाल, इसके आदेश और निर्देश भी आपके ही लोग देते हैं। जब चाहा, मीट- मछली की दुकानें बंद करवा दीं। जब चाहा, जहां चाहा, उनके काम-धंधे बंद करवाए। आपके राज में विश्वविद्यालयों के कुलपतियों तक को अजान से दिक्कत होने लगी, दर्द से सिर फटने लगा।
मुसलमानों के लिए अलग आक्सीजन, अलग खून, अलग वार्ड की मांग आपके ही भक्त करते रहे, उनको किसी ने डांटा डपटा नहीं बल्कि दुलराया ही गया, उनका हौसला हर दिन बढ़ाया गया। मस्जिदों के नीचे मंदिरों का निकलना जारी है। गोदी चैनलों की नफरतिया जुबान आज भी कैंची की तरह चल रही है। मजारों और मस्जिदों पर कूदफांद आपके ही राज की विशेषता है। और अब आपके लोग ‘मोदी की सौगात ‘लेकर जा रहे हैं। इससे ज्यादा घृणित और क्या हो सकता है? इससे बड़ा हिंदुस्तान की सबसे बड़ी अल्पसंख्यक आबादी का मज़ाक़ और क्या हो सकता है!
और अंत में आपके घराने के सुदर्शन टीवी के सर्वेसर्वा सुरेश चव्हाणके ने यह ट्वीट किया है, जिस पर आप अवश्य उछल पड़े होंगे और आपने उनकी बुद्धिमानी की दाद देते हुए फोन अवश्य किया होगा, उसे फिर से पढ़ते जाइए:’ सुना है कि ‘सौगात ए मोदी’ वाले झोले में कंडोम का पैकेट भी डाला गया है।’ हंसिए इस भद्दे मज़ाक़ पर जोर से और ईद मनाइए।