लखनऊ। जैसे ही स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस आता है कानपुर व लखनऊ के बाजार पतंगों से गुलजार हो जाते हैं। इस साल पतंग का कारोबार खास हैं क्योंकि भारत इस साल आजादी की 75 वीं वर्षगांठ मना रहा है।
आपको बता दें कि पतंग और आजादी का बहुत ही पुराना रिश्ता है। अब आपको स्वतंत्रता के पहले लेकर चलते हैं। सन 1927 में भारत में जब भारतीयों की तरफ से साइमन कमीशन गो बैक की शुरुआत हुई तो तमाम लोग अंग्रेजी हुकूमत और रियासतों के विरोध में पतंगों पर साइमन कमीशन गो बैक लिखकर तिरंगा पतंग उड़ाया करते थे। आज आजादी के 75 साल बाद भी यह परंपरा वैसे ही जीवित है और तमाम लोग 15 अगस्त को तिरंगा पतंग उड़ाकर ही सेलिब्रेट करते हैं।
जब भी बात होती है पतंगबाजी की कानपुर व लखनऊ का नाम सबसे पहले आता है। कानपुर में पतंगबाजी के शौकीन ऑर्डर देकर पतंग बनवाते हैं। यहां कई ऐसी जगह हैं जहां बड़े स्तर पर पतंगें बनाई जाती हैं। उनमें से कुछ जगह जैसे चमनगंजए दर्शन, प्रेम नगर, नई सड़क हैं।
अगर हम लखनऊ की बात करें तो हुसैनगंज स्थित डीके काइट्स और हाजी पतंग वाले के यहां देखने को मिला जहां पर तिरंगा पतंग के खरीदारों का तांता लगा हुआ होता है। दोनों ही दुकानें लगभग 60 से 65 साल पुरानी हैं और दोनों में ही शुरुआत से तिरंगा पतंग बिकती आ रही हैं। हाजी सुबराती पतंग फरोश के बेटे ने बताया कि यहां के लोगों में पतंगों का ऐसा क्रेज है कि तमाम लोग स्पेशल तिरंगा पतंग ऑर्डर देकर बनवाते हैं।
हर साल नए डिजाइन की तिरंगा पतंगे बाजार में आती हैं
दोनों दुकान मालिकों ने बताया की 15 अगस्त और 26 जनवरी के दौरान तिरंगा पतंग की अच्छी खासी बिक्री हो जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि हर साल नए नए डिजाइन की तिरंगा पतंगे बाजार में लाई जाती हैं और ग्राहकों द्वारा उन्हें भी काफी पसंद किया जाता है।
तिरंगा पतंगों के साथ होता है जबरदस्त कंपटीशन
जब भी पतंगबाजी की बात होेती है तो बड़े भी बच्चे बन जाते हैं और एक दूसरे की पतंगें काटते हैं। कानपुर के इस नजारे को देखने में बड़ा ही आनंद मिलता है। राजधानी लखनऊ के अभी भी कई पुराने मशहूर इलाके जैसे हुसैनगंज रफ आयाम क्लब आलमबाग में अभी भी स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के दिन तिरंगा पतंग कंपटीशन होता है और जिसमें काफी बड़ी संख्या में लोग हिस्सा लेते हैं।