नई दिल्ली। UPI के जरिए छोटे-बड़े डिजिटल पेमेंट का चलन बढ़ना कुछ कंपनियों पर भारी पड़ा है। मोंडेलेज, नेस्ले, पारले, ITC और मार्स जैसी नामी-गिरामी कंपनियों की कैंडी और टॉफी की बिक्री घट गई है। दरअसल किराना दुकानों पर छुट्टे न होने पर दुकानदार ग्राहकों को 1-9 रुपए तक के कैंडी या टॉफी दे देते थे। UPI ने छुट्टे की समस्या ही खत्म कर दी।
UPI का चलन टॉफी की बिक्री के लिए खतरा
क्रेड, डुंजो के ग्रोथ लीडर और ग्रोथएक्स के फाउंडर अभिषेक पाटील कहते हैं, ‘UPI का चलन जैसे-जैसे बढ़ा यह छुट्टे न होने के नाम पर टॉफी की बिक्री के लिए खतरा बनता गया।’
टॉफी बिक्री में भारी गिरावट
पाटिल ने अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है कि 2010 में मोंडेलेज, नेस्ले, पारले, ITC, मार्स सहित सभी बड़ी कैंडी कंपनियों ने चौंका देने वाला मुनाफा कमाया था, लेकिन 2020 तक ज्यादातर ब्रांड्स की टॉफी बिक्री में भारी गिरावट देखी गई।
अमेरिकी कंपनी हर्शेस ने यहां तक कहा कि भारत कोविड से सबसे ज्यादा प्रभावित बाजारों शुमार है। पाटील ने कहा, ‘हो सकता है कि किसी डेवलपमेंट की आपके बिजनेस से सीधी प्रतिस्पर्धा न हो, फिर भी वह बिक्री घटा सकता है।’
टॉफी-कैंडी का कारोबार ऐसे प्रभावित हुआ..
1. UPI आने से पहले दुकानदार खुल्ले पैसे नहीं होने पर ग्राहकों को टॉफी दे दिया करते थे, लेकिन UPI आने से जितनी राशि का बिल बना, ठीक उतनी ही राशि का भुगतान होने लगा।
2. महामारी के दौरान ग्राहक भी संपर्क रहित भुगतान करना चाहते थे। इसने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया। इसने छुट्टे के बदले टॉफी के चलन की तस्वीर बदल दी।