लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के किसानों को बड़ा तोहफा दिया है। इस तोहफे के साथ सरकारी कर्मचारिेयों को भी इस फैसले कोे अक्षरशः पालन करने के भी आदेश दिए गये है। उल्लेखनीय है कि निजी नलकूपों के कनेक्शन के लिये किसानों को अनावश्यक उत्पीड़न न हो और इसमें विद्युत विभाग के कर्मचारियों की मनमानी न चले इसके लिये उ0प्र0 पावर कारपोरेशन ने कनेक्शन स्वीकृत करने की प्रक्रिया को बदलकर नयी व्यवस्था बना दी है। पूर्व में वितरण खण्डों में स्टीमेट की धनराशि को जमा करने की तिथि को ही प्राथमिक तिथि माना जाता था नये निर्देशों के तहत उपभोक्ता द्वारा निजी नलकूपों के संयोजन प्राप्ति हेतु प्रोसेसिंग फीस जमा करने की तिथि को वरीयता क्रम की प्राथमिकता की तिथि मानी जायेगी। यह मात्र 100 रूपये होती है। इससे विद्युत विभाग के कार्मिकों द्वारा किसानो के उत्पीड़न की सम्भावना खत्म हो गयी है। अब किसान तीन महीने के अन्दर जब भी स्टीमेट जमाकर देगा प्रोसेसिंग फीस के आधार पर उसकी प्राथमिकता तय होगी।
प्रदेश सरकार द्वारा लिए गये फैसले के अनुसार प्रोसेसिंग फीस जमा करने के बाद यदि वह तीन माह के अन्दर स्टीमेट नही जमा करता है तो उसकी प्रियोरिटी खत्म हो जायेगी और उसे पुनः प्रोसेसिंग फीस जमा करनी होगी। यह जानकारी देते हुये प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं उ0प्र0 पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष आलोक कुमार ने बताया है कि मा0 मुख्य मंत्री एवं ऊर्जा मंत्री किसानों को अधिक से अधिक सुविधा देना चाहते है तथा निजी नलकूपो के माध्यम से प्रदेश की सिंचाई क्षमता को बढ़ाना चाहते हैं। इसीलिये यह नये नियम बनाये गये है। इस नये नियम से प्रदेश के किसानों को निजी नलकूपो के लिये विद्युत कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर एवं शोषण से मुक्ति मिलेगी। इसी के साथ साथ निजी नलकूपों के संयोजनों को अवमुक्त करने हेतु प्राक्कलन में लगने वाले सुपरवीजन चार्जेज तथा जी0एस0टी0 अब नहीं लगेगी। निजी नलकूप वाले किसानों की सुविधा के लिये पावर कारपोरेशन ने कई अनेक और घोषणायें भी की हैं। जो किसान अपना विद्युत बिल हर महीने रेग्यूलर जमा करेंगे उनको बिल पर पाॅच प्रतिषत की छूट मिलेगी। इसी तरह यदि किसान किसी काम से बिल जमा करने में विलम्ब करता है और वर्ष में दोबार ही विद्युत बिल जमा कर पाता है तो भी उसको लेट शुल्क नहीं देना होगा।
इस बारे में जानकारी देते हुए प्रमुख सचिव ऊर्जा का कहना है कि यह व्यवस्था किसानों द्वारा फसल होने पर आर्थिक उपलब्धता को दृष्टिगत करके लागू की गयी है। वित्तीय वर्ष (2018-2019) में प्रत्येक 06 माह के बिल का भुगतान अर्थात् माह अप्रैल 2018 से माह सितम्बर 2018 तक के बिल की पूर्ण राशि का भुगतान माह नवम्बर 2018 के अन्त तक तथा अक्टूबर 2018 से माह मार्च 2019 तक के बिल की पूर्ण राशि का भुगतान माह मई 2019 के अन्त तक करने पर उक्त 06 माह की अवधि के बिल राशि पर लगे सरचार्ज को पूर्ण रूप से माफ कर दिया जायेगा। यदि उपभोक्ता द्वारा उपरोक्तानुसार निर्धारित अवधि में बिल का भुगतान नहीं किया जाता है तो उपभोक्ता से उक्त अवधि का नियमानुसार पूर्ण सरचार्ज वसूला जायेगा। इससे प्रदेश के 11 लाख कृषक उपभोक्ताओ को लाभ होगा। कनेक्शन हेतु प्राथमिकता दिये जाने के नये नियम के तहत प्रोसेसिंग फीस जमा होने की तिथि से 3 दिनों के अन्दर सर्वे आर्डर निर्गत कर दिये जायेंगे। सर्वे आर्डर जारी होने के दिनांक से एक सप्ताह में सर्वे पूर्ण करके एस्टीमेट (टर्मस एण्ड कण्डीषन्स) प्राप्त कर उसका विवरण सम्भावित नलकूप उपभोक्ता को एस0एम0एस0, काॅल करके तथा डाक द्वारा सूचित किया जायेगा।
प्रमुख सचिव ऊर्जा ने बताया कि इस प्रकार तैयार होने वाली वरीयता सूची खण्डीय नोटिस बोर्ड पर तथा सामग्री निर्गत कराने हेतु भण्डार केन्द्र को प्रेशित की जायेगी। यदि किसी कारणवश प्रथम वरीयता प्राप्त उपभोक्ता एस्टीमेट (टर्मस एवं कण्डीशन्स) की धनराशि जमा नहीं कर पाता है तो वरीयता सूची में अंकित अगले उन उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जायेगी। जिन्होने प्रोसेसिंग फीस के उपरान्त एस्टीमेट (टर्मस एवं कण्डीशन्स) की धनराशि जमा कर दी है। यदि पूर्व वरीय उपभोक्ता प्रोसेसिंग फीस के उपरान्त एस्टीमेट (टर्मस एवं कण्डीशन्स) की धनराशि निर्धारित अवधि (90 दिन) में जमा कर देता है तो उसकी वरीयता पूर्व की भांति उच्च वरिष्ठताक्रम में आ जायेगी। पुनरीक्षित वरीयता सूची जारी कर खण्डीय नोटिस बोर्ड पर एवं भण्डार केन्द्र को उसी दिन उपलब्ध करानी होगी। खण्डीय स्तर पर उपलब्ध पंजिका में उपरोक्तानुसार समस्त विवरण अंकित किया जायेगा तथा उपरोक्त वरीयता पंजिका जनसाधारण के सुलभ संदर्भ हेतु उपलब्ध होगी। उक्त पंजिका में अंकित विवरण के अनुसार वरीयता में विचलन अथवा अभिलेखीय त्रुटि पाये जाने पर सम्बन्धित अधिशासी अभियन्ता (वितरण) के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी।