चीन ने मोड़ दिया मिसाइल डिफेंस का मुंह, क्या दिल्ली खरीदेगी S-500

नई दिल्ली: कई खबरों में यह दावा किया जा रहा है कि चीन ने भारत की सीमा के पास तिब्बत में अपने एडवांस मिसाइल डिफेंस सिस्टम HQ-29 को तैनात कर दिया है। सोशल मीडिया पर चल रहे कई वीडियो में दिख रहा है कि चीन कई डिफेंस सिस्टम को रेल से ले जाता हुआ दिख रहा है। इसे रूस के S-500 से भी बेहतर होने का दावा किया जा रहा है, जो भारत मॉस्को से खरीद सकता है।

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8 HQ-29 और 16 इंटरसेप्टर मिसाइलें ले जाती दिखी चीन की रेलवे

  • डिफेंस एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, चाइनीज सोशल मीडिया पर कम से कम आठ HQ-29 लॉन्चर्स और 16 इंटरसेप्टर मिसाइलों के साथ रेलवे के जरिये ले जाया जा रहा है। HQ-29 का खुलासा बीजिंग में एक मिलिट्री परेड के दौरान सितंबर, 2025 में किया गया था। हालांकि, HQ-29 के बारे में आधिकारिक तौर पर बहुत कम जानकारी है।
  • एक्सपर्ट्स के अनुमानों के अनुसार, HQ-29 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की रेंज 2,500 किलोमीटर तक हो सकती है और यह 850 किलोमीटर की ऊंचाई तक इंटरसेप्ट कर सकता है। वहीं, कुछ का अनुमान है कि यह 150 से 600 किमी की ऊंचाई तक इंटरसेप्ट कर सकता है। वहीं, मिसाइलों की स्पीड 6 मैक से लेकर 10 मैक तक हो सकती है। यानी यह करीब 7,350 से लेकर 12,250 किमी तक की स्पीड हो सकती है।
  • HQ-29 के बारे में यह भी दावा किया जा रहा है कि यह बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर सकती है। यहां तक कि यह इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों, हाइपरसोनिक हथियारों और पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित सैटेलाइटों को भी मार गिराने में सक्षम है।
  • अगर HQ-29 की ये क्षमताएं वाकई में साबित हो जाती हैं तो यह रूस के S-500 डिफेंस सिस्टम से काफी आगे निकल सकता है, जिसे खरीदने पर भारत विचार कर रहा है। S-500 की रेंज 600 किलोमीटर तक ही है और यह 200 किमी तक की ऊंचाई पर दुश्मन की मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर सकता है।
  • S-500 डिफेंस सिस्टम: क्या रूस से खरीदेगा भारत

    • दिसंबर, 2025 में जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत दौरे पर आए थे तो उस वक्त भी रूस से S-500 डिफेंस सिस्टम खरीदने की चर्चा जोरों पर थीं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रूस के ही एक डिफेंस सिस्टम S-400 ने पाकिस्तान की मिसाइलों और ड्रोंस को तबाह कर दिया था।
    • माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में भारत रूस से S-500 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीद सकता है। डिफेंस एक्सपर्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी बताते हैं कि भारत ने पहले भी रूस के S-400 डिफेंस सिस्टम पर भरोसा जताया था, जिसने बीते साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की चीन से खरीदी मिसाइलों और ड्रोंस को तबाह कर दिया था।
    • चीन के अरुणाचल प्रदेश को लेकर नापाक मंसूबे

      • डिफेंस एक्सपर्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी के अनुसार, 23 दिसंबर, 2025 को अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन ने अमेरिकी संसद को एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें कहा गया था कि चीन के आने वाले वर्षों में तीन कोर इंटरेस्ट हैं, जो इन जगहों को लेने के लिए टार्गेट करेगा।
      • पहला है ताइवान, दूसरा है दक्षिण चीन सागर में स्पार्टले द्वीप और तीसरा भारत का अरुणाचल प्रदेश। चीन 2030 के बाद कभी भी पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत के खिलाफ टू फ्रंट वॉर छेड़ेगा।
      • भारत की क्या है चीन सीमा पर तैयारी

        • डिफेंस एक्सपर्ट जेएस सोढ़ी के अनुसार, मार्च, 2013 से जब से शी जिनपिंग चीन के राष्ट्रपति बने हैं, वो लगातार लद्दाख सीमा के पास सैन्य तैनाती बढ़ा रहे हैं। जिनपिंग का बड़ा मकसद है-भारत के खिलाफ टू फ्रंट वॉर करना। चीन ने तिब्बत में HQ-29 डिफेंस सिस्टम तैनात किया है, वह इसी चीनी मंसूबे का हिस्सा है। ऐसे में भारत S-500 खरीदने पर विचार कर सकता है।
        • भारत ने अपनी अग्नि सीरीज की मिसाइलों की तैनाती की है। इसके अलावा, उसने भी S-400 जैसे डिफेंस सिस्टम की भी तैनाती की है। भारत लगातार अपने एडवांस डिफेंस सिस्टम और मिसाइलों की तैनाती चीन सीमा पर करता रहा है।
        • ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रूस के S-400 की कामयाबी

          • ऑपरेशन सिंदूर के बाद S-500 डिफेंस सिस्टम को गेमचेंजर बताया जा रहा था। पुतिन ने भी उस वक्त एक इंटरव्यू में कहा था कि भारत रूस का भरोसेमंद पार्टनर है, ऐसे में S-500 डिफेंस सिस्टम का संयुक्त उत्पादन हो सकता है।
          • उस वक्त ये भी कहा गया था कि रूस की डिफेंस कंपनी अल्माज आंते भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और भारत डायनामिक्स लिमिटेड के साथ पार्टनरशिप करना चाहती है, जिससे मेक इन इंडिया को बड़ा बूस्ट मिल सकता है। इसमें नासिक या हैदराबाद में फैक्ट्री बनाने की भी बात सामने आई थी, जिसमें 60 फीसदी तक तकनीक ट्रांसफर की भी बात थी।
          • S-500 डिफेंस सिस्टम की खूबी क्या है

            • भारत के पास अभी S-400 डिफेंस सिस्टम है, जो 2007 से है। यह एक थिएटर लेवल डिफेंस सिस्टम है, जो सीमा की हवाई रक्षा करता है।
            • वहीं, S-500 डिफेंस सिस्टम 2021 से रूस की सेना में शामिल है। यह रूस और उसके अंतरिक्ष तक की सुरक्षा करने में सक्षम है। S-400 की रेंज जहां 400 किलोमीटर तक ही है। वहीं, S-500 दुश्मन की बैलेस्टिक मिसाइलों को 600 किमी दूर से ही खत्म कर देगा।

            S-400 और S-500 डिफेंस सिस्टम में बड़ा फर्क?

            S-400 में 40N6 और 9M96 जैसी मिसाइलें हैं, जो आमतौर पर फाइटर जेट्स और क्रूज मिसाइलों के लिए हैं। वहीं, S-500 में 77N6-N सीरीज की हिट-टू-किल मिसाइलें हैं, जो हाइपरसोनिक हथियारों से टकराकर खत्म कर देती हैं।

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