गंगा में इफ्तार पार्टी करने वाले 6 और युवकों को मिली जमानत

प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वाराणसी में पवित्र गंगा नदी में इफ्तार के दौरान मांस खाने के बाद हड्डियां व कचरा नदी में फेंकने वाले छह अन्य आरोपितों दानिश सैफी, नूर इस्लाम, आमिर कैफ़ी, महफूज आलम, मोहम्मद अहमद एवं मोहम्मद अव्वल की भी जमानत मंजूर कर ली है।

Advertisement

यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ल ने दिया है। इससे पहले 15 मई को इसी पीठ ने पांच और न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की पीठ ने तीन आरोपितों की जमानत मंजूर की थी। कोर्ट ने कहा था कि आरोपितों ने अपने कृत्यों के लिए माफी मांगी है।

न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ल की पीठ ने यह भी कहा था कि गंगा सिर्फ हिंदुओं की ही नहीं बल्कि पूरे देश की आस्था की प्रतीक हैं। कोर्ट ने कहा, आरोपितों के हलफनामे के पैरा 14 में किए गए कथन दर्शाते हैं कि वे अपने कृत्यों के लिए खेद व्यक्त कर रहे हैं और उनके परिवारों को भी समाज को हुई पीड़ा पर खेद है।

अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी की इस आशंका पर कि इफ्तार पार्टी का आयोजन, वीडियो का अपलोड होना और धार्मिक विद्वेष पैदा करने के लिए उसका इस्तेमाल बड़ी साजिश का हिस्सा है, कोर्ट ने कहा कि आरोपितों को जेल में आगे हिरासत में रखे बिना भी जांच जारी रह सकती है।

गत 17 मार्च से जेल में बंद आरोपितों ने खेद व्यक्त किया है और भविष्य में ऐसा कोई कृत्य न करने का वचन भी दिया है। मामले के तथ्यों व परिस्थितियों, आरोपितों की आपराधिक पृष्ठभूमि न होने, पहले से भुगती गई हिरासत की अवधि और उनके द्वारा मांगी गई माफी को ध्यान में रखते हुए प्रथम दृष्टया जमानत का मामला बनता है।

अभियोजन कथानक यह है कि वाराणसी के कोतवाली थाने में 16 मार्च को भाजुयमो अध्यक्ष रजत जायसवाल ने इस घटना को लेकर एफआइआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि 15 मार्च को गंगा में नाव पर इफ्तार करने वाले लोगों ने मांस खाकर कचरा नदी में फेंक दिया।

आरोपितों के कृत्य से समुदाय विशेष की भावनाएं आहत हुईं। इसके बाद आरोपितों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ पूजा स्थल को अपवित्र करने, धार्मिक भावनाएं आहत करने व वसूली से संबंधित धाराएं लगाई गईं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here