नई दिल्ली: भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दौरे के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा दांव चला है। नरेंद्र मोदी सरकार ने लद्दाख में जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की एक पीठ बनाने का फैसला किया है। केंद्र सरकार के इस दांव से पाकिस्तान की तिलमिलाहट बढ़नी तय है, जो पहले से ही खीझा हुआ है।
लद्दाख को मिलेगी J&K हाई कोर्ट की बेंच
केंद्रीय कैबिनेट ने गुरुवार को लद्दाख में जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की एक बेंच बनाने का फैसला किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया X पर पोस्ट किया, ‘केंद्रीय कैबिनेट ने…लद्दाख में जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की एक बेंच बनाने का फैसला किया है। इससे लद्दाख के दूर-दराज इलाकों में रहने वाले नागरिकों के लिए न्याय तक पहुंच बेहतर होगी, क्योंकि उन्हें मिलने वाली कानूनी सेवाओं के लिए लगने वाला समय कम हो जाएगा।’ यह फैसला तब हुआ है, जब सर्जियो गोर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दौरे पर हैं।
नरेंद्र मोदी सरकार के इस फैसले की लद्दाख में जमकर तारीफ हो रही है। वहीं, इसे बड़ा कूटनीतिक दांव भी माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे पाकिस्तान की तिलमिलाहट और बढ़नी तय है, क्योंकि वो जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में किसी भी बदलाव का विरोध करता आया है। 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 का दर्जा खत्म करने पर भी पाकिस्तान में काफी विरोध हुआ था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लद्दाख में जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की एक बेंच स्थापित करने का निर्णय लिया है। इससे लद्दाख के दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले नागरिकों के लिए न्याय तक पहुंच काफी बेहतर होगी, क्योंकि उन्हें मिलने वाली कानूनी सेवाओं को प्राप्त करने में लगने वाला समय कम हो जाएगा।
सर्जियो गोर के इस बयान से पाकिस्तान को लगी मिर्ची
- भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर के दौरे में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की, जिसके बाद पाकिस्तान ने अमेरिकी राजनयिक को तलब किया है।
- श्रीनगर में मुलाकात के बाद साउथ और सेंट्रल एशिया के लिए अमेरिका के विशेष दूत सर्जियो गोर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ‘यह भारत का अहम हिस्सा है।’ सर्जियो गोर के दौरे के बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद में अमेरिकी चार्ज डी’ अफेयर्स को तलब कर लिया।
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पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय क्या बोला
- पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा-‘आज इस्लामाबाद में अमेरिकी चार्ज डी’ अफेयर्स को विदेश मंत्रालय में तलब किया गया और भारत में अमेरिकी राजदूत द्वारा जम्मू और कश्मीर के दौरे के दौरान जम्मू-कश्मीर की स्थिति के बारे में दिए गए तथ्यात्मक रूप से गलत बयानों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया।’
- पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर को ‘भारत का हिस्सा’ बताए जाने की कड़ी निंदा करते हुए इसे खारिज कर दिया. इस बात पर ज़ोर दिया गया कि जम्मू-कश्मीर एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विवादित क्षेत्र है, जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों और कश्मीरी लोगों की आकांक्षाओं के अनुसार अपने अंतिम समाधान का इंतजार कर रहा है।’
- लद्दाख के उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इस ‘ऐतिहासिक फैसले’ का स्वागत किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का दिल से आभार जताया है।
पाकिस्तान के लिए इसका क्या मतलब है?
- मजबूत एकीकरण: भारत का यह कदम लद्दाख पर भारत के स्थायी प्रशासनिक और कानूनी नियंत्रण को और मजबूत करता है, जिसे 2019 में एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था।
- भू-राजनीतिक चुनौती: पाकिस्तान लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में संवैधानिक या संस्थागत ढांचों को मजबूत करने के भारत के किसी भी कदम का विरोध करता है, क्योंकि वह इस क्षेत्र को विवादित इलाका मानता है।
- कूटनीतिक रुख: यह पाकिस्तान और क्षेत्र के अन्य देशों को संकेत देता है कि भारत इस इलाके के पूर्ण नागरिक और न्यायिक एकीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है।










