नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की हालिया टिप्पणी के बाद कांग्रेस बेहद एक्टिव हो गई है। देश की मुख्य विपक्षी पार्टी ने कहा कि जस्टिस भुइयां ने निर्वाचन आयोग और उसके प्रमुख ज्ञानेश कुमार को बेनकाब कर दिया है। ऐसे में ज्ञानेश कुमार के पास अब पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
जयराम रमेश ने मांगा ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर दावा किया कि जस्टिस भुइयां ने मतदान के अधिकार को संविधान की मूल संरचना का हिस्सा बताते हुए जो टिप्पणी की है, उससे यह निष्कर्ष निकलता है कि संवैधानिक पद पर बैठे ज्ञानेश कुमार ने संविधान का उल्लंघन किया है। जयराम रमेश ने कहा कि जस्टिस भुइयां ने और भी बहुत कुछ कहा है और सीईसी को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।
‘जी-2’ कह कर की ये टिप्पणी
कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार में जरा भी शर्म है तो उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि कुमार की ‘जी-2 के अवैध आदेशों को लागू करने की क्षमता’ अब उन्हें देश के लिए एक बोझ बना चुकी है। जयराम रमेश ‘जी2’ शब्द का इस्तेमाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के लिए करते हैं।
जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कही थी ये बात
न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां ने रविवार को हैदराबाद स्थित नालसार विश्वविद्यालय में ’19वीं न्यायमूर्ति बी.आर. साहनी मेमोरियल कोर्ट प्रतियोगिता’ के समापन समारोह में कहा था कि ऐसी कोई भी प्रक्रिया, जिसके परिणामस्वरूप लाखों भारतीय नागरिकों को मताधिकार से वंचित किया जाता है, ‘स्वाभाविक रूप से मनमानी’ होगी। ये संविधान के तहत स्थापित संवैधानिक व्यवस्था का निषेध होगी।
उन्होंने कहा था कि संविधान नागरिकों के दो वर्ग, ‘मताधिकार वाले और मताधिकार से वंचित’ नहीं बनाता। उज्ज्वल भुइयां का यह भी कहना था कि बड़े पैमाने पर लोगों को मताधिकार से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 326 और 14 का उल्लंघन है।










