लखनऊ। भाकपा (माले) की राज्य इकाई ने लॉकडाउन-जनित बेरोजगारी व अभावों के चलते लखीमपुर खीरी के मैगलगंज में भानू प्रसाद द्वारा रेल से कटकर आत्महत्या करने के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी इसके खिलाफ सोमवार (एक जून) को लखीमपुर खीरी में धरना देगी। धरना व्यक्तिगत दूरी (फिजिकल डिस्टेंसिंग) समेत लॉकडाउन प्रावधानों का पालन करते हुए जिला मुख्यालय स्थित पार्टी कार्यालय पर और गांवों में दिया जाएगा।
राज्य सचिव सुधाकर यादव ने कहा कि भानू की आत्महत्या और उसकी जेब से मिला सुसाइड नोट मोदी-योगी की सरकार के दावों की पोल खोलता है। यह घटना इस बात का प्रमाण है। लॉकडाउन के दौरान गरीब-मजदूर परिवारों के सामने जीवन निर्वाह की पैदा हुई वास्तविक कठिनाइयों का सरकार को जरा भी इल्म नहीं है और सरकारी राहत पैकेज गरीबों की जानें बचाने में फेल हैं।
लॉकडाउन में रोजगार गंवाने वाले भानू के पास यदि कुछ नगदी होती तो वह परिवार को जिंदा रखने की न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति कर पाता और बीमार मां सहित खुद का इलाज भी करा पाता। सरकार को अपने कोरोना राहत पैकेज को गरीबों की आर्थिक तंगी और जमीन की हालात से निपटने के अनुरूप बनाना चाहिए।
राज्य सचिव ने कहा कि धरना के माध्यम से भानू के परिवार को दस लाख रुपये मुआवजा देने, सभी गरीब-प्रवासी मजदूर परिवारों को प्रतिमाह दस हजार रुपये लॉकडाउन भत्ता व प्रति व्यक्ति 15 किलो मुफ्त राशन छह माह तक देने और रोजगार की गारंटी करने की मांग की जाएगी। केंद्रीय समिति सदस्य कृष्णा अधिकारी जिला पार्टी कार्यालय पर धरने का नेतृत्व करेंगी।
इस बीच, माले राज्य सचिव ने रविवार को जारी एक अन्य बयान में बिजली को निजी क्षेत्र में सौंपने की केंद्र सरकार की कोशिशों के खिलाफ सोमवार को बिजलीकर्मियों के देशव्यापी प्रतिवाद का समर्थन किया है। उन्होंने कहा विद्युत संशोधन बिल 2020 के जरिए बिजली को निजी हाथों में सौंपकर केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कीमत पर कारपोरेट को फायदा पहुंचाना चाहती है। इसके खिलाफ बिजली कर्मियों का आंदोलन जनहित में है और इसे रोकने की सरकार की कोशिश अलोकतांत्रिक है।
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