मुआवजा को लेकर जीएसटी परिषद की बैठक एक बार फिर बेनतीजा

नई दिल्‍ली। वस्‍तु एवं सेवा कर (जीएसटी) मुआवजा को लेकर जीएसटी परिषद की बैठक एक बार फिर बेनतीजा रही। बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को यहां आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि जिस मुद्दे को लेकर ये बैठक हुई उसपर आम सहमति नहीं बन पाई।

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हालांकि, वित्‍त मंत्री ने कहा कि जीएसटी काउंसिल की 42वीं बैठक में 9ए पर चर्चा हुई। उन्‍होंने कहा कि बैठक में उधार लेने और सेस को बढ़ाए जाने पर भी चर्चा हुई। उन्‍होंने कह कि राज्य कुछ स्पष्टीकरण चाहते थे, उन्हें स्पष्टीकरण दिया गया।

सीतारमण की अगुवाई में राज्यों के वित्त मंत्रियों वाली जीएसटी परिषद लगातार तीसरी बार जीएसटी राजस्व में कमी की क्षतिपूर्ति को लेकर चर्चा की। वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्‍यों के सामने दो विकल्‍प रखे थे। इसमें देश के 21 राज्य पहले विकल्‍प पर सहमत हैं. जबकि बाकी राज्य केंद्र के प्रस्ताव से सहमत नहीं हैं। उन्‍होंने कहा कि बैठक में सभी राज्यों के साथ विस्तार से चर्चा हुई।

वित्‍त मंत्री ने कहा कि सेस से प्राप्‍त संग्रह राज्यों को मुआवजा देने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि इस कमी को अब बाजार से पैसा उठाकर पूरा किया जाएगा। निर्मला सीतारमण ने ये साफ किया है कि इस बैठक में उन मुद्दों पर कोई सहमति नहीं बन सकी, जिन पर विवाद हो रहा था। उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद सेस और उसके संग्रह समेत इसके कलेक्शन की अवधि को बढ़ाने तक के बारे में फैसला कर सकती है।

सीतारमण ने कहा कि केंद्र सरकार का प्रस्ताव कानून के दायरे में है लेकिन कुछ राज्यों को केंद्र के प्रस्‍ताव मंजूर नहीं है। ऐसे में देखते हैं कि अब इसका क्‍या समाधान निकलता है। केंद्र के प्रस्ताव का विरोध करने वाले राज्यों में दिल्ली, केरल, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु शामिल हैं।

इस बैठक में वित्‍त मंत्री के साथ वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री थे। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकारों के तमाम वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।

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