अमेरिका के निशाने पर क्यों है ईरान का केश्म आइलैंड?

अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट में ईरान के केश्म आइलैंड पर मौजूद एक कम्युनिकेशन टावर को निशाना बनाया। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह हमला आत्मरक्षा के तहत किया गया।

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इसके अलावा अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास एक ऑयल टैंकर पर भी हमला किया। CENTCOM ने इस कार्रवाई का ड्रोन वीडियो जारी किया है, जिसमें बोत्सवाना के झंडे वाला टैंकर आग की लपटों में घिरा दिखाई दे रहा है। अमेरिकी नाकेबंदी के दौरान निशाना बना यह टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से होकर ईरान के खार्ग आइलैंड की तरफ जा रहा था।

ईरान का केश्म आइलैंड करीब 1,445 वर्ग किलोमीटर में फैला, खाड़ी क्षेत्र का सबसे बड़ा द्वीप है। यह आइलैंड कभी फ्री-ट्रेड जोन और टूरिस्ट जगह के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यह एक बड़े सैन्य ठिकाने में बदल चुका है।

होर्मुज स्ट्रेट के प्रवेश द्वार पर मौजूद यह द्वीप रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। अमेरिका इसे कई वजहों से बड़ा सैन्य खतरा मानता है।

  • अंडरग्राउंड सैन्य नेटवर्क: रिपोर्ट्स के मुताबिक, केश्म द्वीप के नीचे सुरंगों और नमक की गुफाओं का बड़ा नेटवर्क है। यहां ईरान ने तटीय मिसाइल सिस्टम और तेज हमला करने वाली नौकाएं छिपाकर रखी हैं।
  • समुद्री रास्तों पर नियंत्रण के लिए अहम: द्वीप के अंदर ईरान ने ऐसे सैन्य ठिकाने बनाए हैं, जिनका मकसद समुद्री रास्तों पर नियंत्रण रखना है। माना जाता है कि यहां से होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही रोकी या सीमित की जा सकती है।
  • दुनिया की तेल सप्लाई पर असर: होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल और गैस समुद्री रास्तों में से एक है। अमेरिका के मुताबिक, ईरान ने केश्म द्वीप का इस्तेमाल तेल टैंकरों की आवाजाही रोकने या दबाव बनाने के लिए किया है।
  • अमेरिका-ईरान तनाव का बड़ा केंद्र: हाल के महीनों में यह द्वीप अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव का प्रमुख केंद्र बन गया है। पहले भी ईरान की तरफ से क्षेत्रीय अमेरिकी ठिकानों पर कार्रवाई के बाद अमेरिका ने केश्म द्वीप पर IRGC के ठिकानों और कम्युनिकेशन सिस्टम पर हमले किए थे।

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