सामान्य सीटों पर भी दलित प्रत्याशी उतारेगी सपा! PDA को मजबूत करने की कोशिश

लखनऊ : 2024 में पीडीए की सफलता को देखते हुए समाजवादी पार्टी विधानसभा चुनावों में भी आरक्षित सीटों के अलावा सामान्य सीटों पर दलित उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है। पार्टी ने आरक्षित सीटों के अलावा करीब 14-15 सामान्य विधानसभा सीटों पर भी दलित प्रत्याशी उतारने के संकेत दिए हैं। इन सीटों पर पार्टी ने संभावित उम्मीदवारों को तैयारी में जुटने के निर्देश दिए हैं।

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यदि यह योजना अमल में आती है तो सपा के कुल दलित और जनजातीय प्रत्याशियों की संख्या 100 के आसपास पहुंच सकती है। 2024 के लोकसभा चुनावों में भी सपा ने दो सामान्य लोकसभा सीटों से दलित प्रत्याशियों को उम्मीदवार बनाया था। इसमें फैजाबाद सीट से अवधेश प्रसाद को जीत मिली थी। वहीं, मेरठ में सपा उम्मीदवार को करीबी मुकाबले में हार मिली थी।

किन सीटों पर है नजर

सपा जिन सामान्य सीटों पर दलित प्रत्याशी उतार सकती है, उसमें लखनऊ की सरोजनीनगर, रायबरेली की ऊंचाहार, गोरखपुर की चौरी चौरा, आगरा उत्तर, मेरठ सदर और हरदोई सदर जैसी सीटें शामिल हैं। इसके अलावा पूर्वांचल कई ऐसी विधानसभा सीटें है, जहां पार्टी सामान्य सीट पर दलित उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 सीटों में 84 अनुसूचित जाति (एससी) और दो अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित हैं। पार्टी का फोकस खासतौर पर उन क्षेत्रों पर है जहां दलित वोटरों की हिस्सेदारी 20 से 25% तक है और वे चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की स्थिति में हैं।

किसको मिलेगा मौका

जिन सामान्य सीटों पर पार्टी दलित उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है। उसमें जेन-जी चेहरों को मौका मिलेगा। इसमें समाजवादी पार्टी छात्रसभा और लोहियावाहिनी से जुड़े युवा चेहरों को भी मौका मिल सकता है।

PDA फॉर्मूले को और मजबूत करने का हिस्सा

सपा के वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक यह रणनीति पार्टी के PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को और मजबूत करने का हिस्सा है। पार्टी का आकलन है कि 2024 लोकसभा चुनाव में PDA की सामाजिक गोलबंदी का फायदा मिला था और उसी मॉडल को विधानसभा चुनाव में और विस्तार देने की तैयारी की जा रही है।

राजनीति में दलित वोट लंबे समय तक बसपा का मुख्य आधार रहा है, लेकिन पिछले कुछ चुनावों में बसपा का प्रदर्शन लगातार कमजोर हुआ है। ऐसे में सपा को लगता है कि दलित समाज का एक बड़ा हिस्सा नए राजनीतिक विकल्पों की ओर देख रहा है। यही वजह है कि पार्टी प्रदेशभर में पीडीए सम्मेलन करवा रही है, उसमें अंबेडकरवाहिनी बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही है।

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