नई दिल्ली: राहुल गांधी से लेकर अखिलेश यादव तक विपक्ष के दिग्गज नेता यूपीआई पर MDR यानी (Merchant Discount Rate) का कड़ा विरोध कर रहे हैं। लेकिन इस बीच बीजेपी ने इस मामले को लेकर मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीजेपी सूत्रों का कहना है कि MDR पर सिफारिश को लेकर जो समिति बनाई गई थी, उसमें पी चिदंबरम, गौरव गोगोई और मनीष तिवारी सहित कांग्रेस के 6 सांसद शामिल थे।
फंडिंग की कमी का हवाला
बीजेपी सूत्रों के हवाले से इंडिया टुडे ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि संसदीय वित्त समिति की रिपोर्ट में टियर्ड रेवेन्यू मॉडल की सिफारिश की गई थी। जब रिपोर्ट अपनाई, तब पी. चिदंबरम और मनीष तिवारी समेत कांग्रेस के पांच सांसद इस समिति के सदस्य थे। पैनल ने UPI इकोसिस्टम में फंडिंग की कमी का हवाला दिया और वित्तीय स्थिरता की जरूरत पर जोर दिया गया।
कोई भी असहमति नहीं थी
रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस के 6 सांसद पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल, प्रमोद तिवारी और के. गोपीनाथ इस समिति का हिस्सा थे। 12 अगस्त को जब रिपोर्ट को मंजूरी दी गई, तब वे वहां मौजूद थे। प्रकाशित मिनट्स में किसी भी तरह की असहमति दर्ज नहीं की गई।
कांग्रेस सांसदों की सहमति!
बीजेपी ने सवाल पूछा है कि राहुल गांधी उस चीज का विरोध क्यों कर रहे हैं, जिसका समर्थन संसद के अंदर उनके ही सांसदों ने किया था, जिनमें पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और पूर्व UPA मंत्री मनीष तिवारी भी शामिल हैं? समिति ने UPI के लिए एक स्तरीय MDR/रेवेन्यू फ्रेमवर्क की मांग की थी और कहा था कि इसे बिना किसी देरी के नोटिफाई और लागू किया जाना चाहिए।
सब्सिडी पर ज्यादा निर्भरता
बीजेपी के भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली समिति ने बजट आवंटन और लागत के बीच के अंतर पर चिंता जताई थी। बताया जा रगा है कि UPI इकोसिस्टम के लिए 2,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित हुआ और इंडस्ट्री की अनुमानित 20,700 करोड़ रुपये की ऑपरेशनल लागत आई। समिति ने कहा कि ज्यादा वैल्यू वाले ट्रांजैक्शन पर कैलिब्रेटेड MDR की अनुमति देने के लिए कानूनी प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन इस फ्रेमवर्क को नोटिफाई करने और लागू करने में किसी भी तरह की देरी से पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर अपर्याप्त सब्सिडी पर बहुत ज्यादा निर्भर हो जाएंगे।










