इस्लामाबाद: पाकिस्तान के लिए बलूचिस्तान नासूर बनकर चुभ रहा है। आज हालात इतने खराब हैं कि पाकिस्तानी सैनिक बलूचिस्तान जाने से डर रहे हैं। इसका प्रमुख कारण विद्रोही समूह बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के बढ़ते हमले हैं। बीएलए ने पाकिस्तानी सेना की नाक में दम कर रखा है। वे ग्वादर से लेकर क्वेटा, कलात और तुरबत तक पाकिस्तानी सेना पर हमले कर रहे हैं।
अफगानिस्तान से लगी सीमा के एक बड़े इलाके से पाकिस्तानी सेना का सफाया हो चुका है। और इसका पूरा श्रेय बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी को जाता है। उन्होंने पिछले 8 दिनों के अंतर बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना पर कुल 22 हमले किए हैं, जिनमें 26 सुरक्षाकर्मियों को मारने का दावा किया गया है। यह बताता है कि बलूचिस्तान में बलूच विद्रोही कितने ताकतवर हैं।
बलूच नेता मीर यार बलूच का दावा है कि बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी में कम से कम 1 लाख लड़ाके शामिल हैं। उनका यह भी दावा है कि इस विद्रोही संगठन को बलूच लोगों का पूरा समर्थन हासिल है। उन्होंने कहा कि यह संगठन गुरिल्ला युद्ध और सड़क पर लड़ाई दोनों तकनीकों का इस्तेमाल करता है। उनका यह भी दावा है कि बलूच विद्रोही पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर हमले करते हैं, उनके सैनिकों को पकड़ते हैं और हथियारों को लूट लेते हैं। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के ज्यादातर हथियार पाकिस्तानी सेना के हैं, जिनका इस्तेमाल बलूच लोगों के खिलाफ किया जाना था।
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी का गठन
इसका गठन बलूचिस्तान की आजादी के लिए किया गया था, क्योंकि बलोच लोगों का 1947 से मानना है कि उन्हें जबरदस्ती पाकिस्तान में शामिल किया गया था। वह खुद एक स्वतंत्र मुल्क के तौर पर स्थापित होना चाहते थे, लेकिन पाकिस्तान ने सेना भेजकर कलात के खान को बंदी बना लिया और इस इलाके का जबरदस्ती विलय कर लिया। हालांकि, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) 1970 के दशक में पहली बार चर्चा में आया।
बलोच लोगों ने जुल्फिकार अली भुट्टो के खिलाफ सशस्त्र बगावत शुरू कर दी थी। लेकिन, लेकिन सैन्य तानाशाह जियाउल हक ने अपने शासनकाल में बलोच नेताओं से बातचीत कर इस विद्रोह को शांत कर दिया, जिसके बाद बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी गायब हो गई। हालांकि, 2000 के दशक में यह गुट फिर सक्रिय हुआ और उस वक्त ही बीएलए की आधिकारिक स्थापना हुई।
बीएलए ने वर्ष 2000 से ही बलूचिस्तान में अपनी मौजूदगी का अहसास करना शुरू कर दिया। उसने पूरे बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सैन्य और नागरिक प्रतिष्ठानों पर हमले किए। शुरुआत में बीएलए में मैरी और बुगती जनजाति के लोग शामिल थे, लेकिन बाद में इनकी तादाद बढ़ने लगी और पाकिस्तान के खिलाफ लड़ने वाला हर बलूच इसमें शामिल होने लगा।












