तेहरान: ईरान और ओमान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के रास्ते को लेकर समझौते के करीब पहुंच गए हैं। इसकी घोषणा ईरान के विदेश मंत्रालय ने की है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पुष्टि की है कि दोनों देश रास्ते के नक्शे को लेकर सहमत हैं, लेकिन संयुक्त बयान पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि संयुक्त बयान पर सहमति बनते ही इस समझौते की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। इसके तहत ईरान और ओमान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की निगरानी करेंगे और उन्हें नौवहन में मदद भी करेंगे।
इस्माइल बघाई ने कहा, “आवाजाही के रास्ते के नक्शे को लेकर सहमति बन गई है। लेकिन हमारी योजना थी, और अब भी है, कि इस सहमति को एक पैकेज के रूप में अंतिम रूप दिया जाए: नक्शा और साथ में एक संयुक्त बयान। हालांकि, बघाई ने इस समझौते के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी। इस बीच ईरान-ओमान समझौते को लेकर जो बातें सामने आई हैं, उनके अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाज फारस की खाड़ी से ईरान के तट के साथ उत्तरी रास्ते से अरब सागर की ओर गुजरेंगे और ओमान के तट से सटे दक्षिणी रास्ते से अरब सागर से फारस की खाड़ी की ओर जाएंगे।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पहले क्या थे नियम?
ईरान युद्ध के पहले जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश या निकास के लिए किसी भी रास्ते का उपयोग कर सकते थे। इस समय अमेरिका और ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी कर रखी है। ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने के दौरान केवल उत्तरी रास्ते का इस्तेमाल न करने वाले जहाजों पर मनमाने ढंग से हमले कर रहा है। वहीं, अमेरिका ईरान की ओर आने-जाने वाले जहाजों को निशाना बना रहा है। इससे होर्मुज पार करने वाले जहाजों पर हमेशा हमले का खतरा मंडरा रहा है।
ट्रंप ने ओमान पर बमबारी की धमकी दी
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ओमान ईरान की नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश करता है, तो उस पर भी बमबारी की जाएगी। ट्रंप की इस धमकी से मध्य पूर्व में तनाव फिर बढ़ गया है। ओमान, अमेरिका का पुराना सहयोगी है, लेकिन वह होर्मुज की नाकेबंदी खत्म करने के लिए ईरान के साथ समझौता कर रहा है। ट्रंप इसी से नाराज हैं और उन्हें लगता है कि इस समझौते से ईरान की नाकेबंदी टूट जाएगी और वह अमेरिका के साथ बातचीत की मेज पर नहीं लौटेगा।
ईरान-ओमान समझौते से भारत को फायदा?
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और ओमान में समझौता होने से भारत को राहत मिल सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी मेहनत कर रहा है। भारत उन देशों से तेल और गैस की खरीद कर रहा है, जहां से लाने की लागत काफी ज्यादा है। इसका सीधा असर भारत में तेल और गैस की कीमतों पर पड़ रहा है। ऐसे में अगर ईरान-ओमान समझौते के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य खुलता है और जहाजों की आवाजाही शुरू होती है, तो इससे भारत में तेल और गैस की कीमतें कम हो सकती हैं।












