GDP आंकड़ों और बढ़ती महंगाई पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

नई दिल्ली। आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार की नीतियों को लेकर हमलावर रही कांग्रेस ने पहली तिमाही में जीडीपी विकास दर 7.8 प्रतिशत के आंकड़े पर सवाल उठाया है।

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पार्टी ने दावा किया कि मोदी सरकार हकीकत में जनता को निरंतर महंगाई का जोरदार झटका दे रही है तो दूसरी ओर आर्थिक विकास से जुड़े आंकड़ों की बाजीगरी कर देश को गुमराह कर रही है।

पहली तिमाही के जीडीपी विकास दर में हेर-फेर का आरोप लगाते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि बार-बार मेथडोलॉजी बदलकर मोदी सरकार जीडीपी के आंकड़ों को अपने हिसाब से सेट कर रही है जबकि भारत की बदहाल आर्थिक हकीकत को छिपाया जा रहा है।

वास्तविकता में रसोई महंगी करने से लेकर आम आदमी से घर बनाने का सपना भी छीना जा रहा है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पहली तिमाही की जीडीपी दर पर पीएम मोदी के खुशी जताने पर जवाबी वार करते हुए एक्स पोस्ट में कहा, आप कह रहे हैं कि देश जीडीपी ग्रोथ का जश्न मना रहा है। आपके पास यह सुविधा हो, लेकिन आम आदमी के पास नहीं है।

आम लोग तीन ‘यू’ असाधारण बेरोजगारी, असहनीय महंगाई और बेलगाम असमानता के बोझ तले दबे हैं और इसके जिम्मेदार आप हैं। बेरोजगारी 50 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर है। 40 प्रतिशत युवा ग्रेजुएट बिना नौकरी के हैं। जुलाई 2026 में 15 से 29 साल की उम्र के हर छह में से एक युवा बेरोजगार था। हर साल दो करोड़ नौकरियों का वादा टूट चुका है।

खरगे ने कहा कि चीनी, प्याज, टमाटर, दाल, खाद्य तेल , चावल, दूध तथा रसोई की हर जरूरी चीज महंगी हो गई है। पेट्रोल-डीजल, एलपीजी-सीएनजी गैस महंगाई के कारण खरीदना मुश्किल हो गया है जिससे मिडिल क्लास परिवार किसी तरह गुजारा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और गरीबों ने तो उम्मीद छोड़ दी है और असमानता ब्रिटिश शासन से भी बदतर है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा कि बेहिसाब क्रोनीकैपिटलिज्म ही सरकार की इकॉनमिक पॉलिसी है और 2014 से अब तक 16 लाख करोड़ से ज्यादा के कॉर्पोरेट लोन माफ किए गए हैं और पीएम अपने एक खास दोस्त के लिए पर्सनल ट्रैवल एजेंट की तरह काम कर रहे हैं।

सोना न खरीदने और विदेश यात्रा न करने की पीएम की बार-बार की नसीहतें अर्थव्यवस्था की जमीनी हकीकत दिखाती हैं।

जयराम रमेश ने कहा कि नॉमिनल और रियल जीडीपी के बीच का अंतर महंगाई को दर्शाता है और सरकार के मुताबिक यह अंतर सिर्फ 2.3 प्रतिशत है। लेकिन इसी तिमाही में थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई 9 प्रतिशत से अधिक रही है जो एक स्पष्ट विसंगति है।

सरकार ईमानदार आंकड़े पेश करती तो वास्तविक ग्रोथ का आंकड़ा काफी कम होता और मोदी सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार समेत कई लोग यह बात कह चुके हैं।

जयराम ने जीडीपी आंकडें पर तंज कसते हुए कहा कि मेक इन इंडिया ने भले ही बहुत कम हासिल किया हो लेकिन मोदी सरकार की सिग्नेचर स्कीम फेक इन इंडिया बिना रुके जारी है।

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